सार्थक जीवन की बात विषय वाले सत्र में मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने कहा कि पूजा-पाठ बुढ़ापे के लिए नहीं है। यह जवानी के दिनों के लिए है। अध्यात्म और पूजा युवाओं के लिए है। ताकि वह जीवन का असली मतलब समझ सकें। होता इसका उल्टा है। जब हम बुढ़ापे में होते हैं तब पूजा करना शुरू करते हैं। अपनी अज्ञानताओं के लिए भगवान से माफी मांगते हैं। यदि वही लोग युवा दौर में पूजा-पाठ का सहारा ले लें तो उनसे गलती ही ना हो।
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बच्चों को राम और कृष्ण की कहानियां सुनाइए
बच्चों को हम मॉरल एजुकेशन देने के लिए काल्पनिक कहानियां सुनाते हैं। बेहतर यह होता कि हम उन्हें राम और कृष्ण की असली कहानियां सुनाते। उससे उनमें असल मोटिवेशन आएगा।
पहले कथा वाचन का अनुभव
मेरा पहला कथा वाचन का अनुभव खेल ही था। जब कथा शुरू होने वाली थी तो उसके कुछ देर पहले मैं बच्चों के साथ खेल रही थी।
तनाव खत्म करने के टिप्स दिए
Amar Ujala Samvad
- फोटो : अमर उजाला
जया किशोरी ने परीक्षा के समय तनाव खत्म करने के टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि नंबर ही सबकुछ नहीं होता। लेकिन अध्यात्म हमें सिखाता है कि सब कुछ जैसा कुछ होता ही नहीं है। सच सिर्फ ईश्वर ही है। बाकी सब चीजें बनती-बिगड़ती रहती हैं।
पैरेंट्स कैसे डील करें
जया किशोरी ने कहा कि हर व्यक्ति अपनी जिंदगी में कुछ ना कुछ कर लेता है। एक की तुलना दूसरे से नहीं से नहीं करनी चाहिए। बच्चों की रुचि के अनुसार उनका करियर चुने।
जिस काम को करके नींद अच्छी आए
जया किशोरी ने कहा कि काम वह करना चाहिए जिसे करके नींद अच्छी आए। अपने बच्चों को ऐसी सीख दे दीजिए। कोई भी जीवन में भूखा नहीं मरता है।
मुझे मेरी मर्जी से गुस्सा आता है
Amar Ujala Samvad
- फोटो : अमर उजाला
मैंने अपनी जिंदगी का रिमोट कंट्रोल किसी और को नहीं दे रखा है। मुझे गुस्सा आता है, मैं रोती भी हूं, मैं उदास भी होती हूं। लेकिन सब अपनी मर्जी से करती हूं। दूसरे के अनुसार मैं अपना मूड नहीं बदलती। वह आदमी रोबोट है जो रोता, हंसता या गुस्सा नहीं करता।
घर पर रहने पर रूटीन क्या होता है
Amar Ujala Samvad
- फोटो : अमर उजाला
जया किशोरी ने कहा है कि जब मैं घर में रहती हूं तो कोशिश करते हैं कि हम पूरा दिन साथ में रहे। सुबह की चाय लेकर शाम के खाने तक सब साथ में रहें। अगर फिल्म देखती हूं तो भी सब साथ देखते हैं।
कुछ मुझसे दूरी बना लेते हैं
पड़ोसियों और रिश्तों पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे बदलाव से खुश होते हैं। जबकि कुछ को इससे चिढ़ होती है। कई जगह ऐसी होती हैं जहां मैं काम की बात नहीं करती बस एक लड़की बनकर रहती हूं। मेरी मां-बाप के लिए तो मैं वही बच्चा हूं।
अपनों के खोने पर क्या करें
Amar Ujala Samvad
- फोटो : अमर उजाला
हम यह नहीं तय कर सकते कि हमारा जीवन कब खत्म होगा। हम यह मानकर बैठे होते हैं कि हम सत्तर-अस्सी साल जिंदा ही रहेंगे। ऐसा नहीं सोचना चाहिए। ये हमारे हाथ में नहीं होता। कुछ हालात हमारे हाथ में नहीं होते जैसे मौसम तो बदलेंगे ही हमें उनके अनुसार ढलना होता है।
हम मृत्यु के बारे में बात नहीं करते
हम घरों में मृत्यु के बारे में बात नहीं करते। यदि हम बात करते रहें तो मृत्यु को लेकर हमारा डर कम होगा। मृत्यु ही एकमात्र सत्य है जिसका घटित होना तय है।
शादी के बाद आता है बदलाव
शादी के बाद लड़की की जिंदगी में ज्यादा बदलाव आता है। मुझे भी इसको लेकर तनाव होता है। मैं एक पारिवारिक औरत हूं लेकिन अपनी शर्तों के साथ, वो मेरी च्वाइस नहीं होनी चाहिए। मां अपनी कुंठाएं अपने बच्चों को ट्रांसफर करती हैं।
अंत में जया किशोरी ने भजन भी सुनाया। "मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है, मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है", करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है। मेरा आपकी कृपा से सब काम हो रहा है। किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए, किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए, जुबां पर राधा-राधा नाम हो जाए, जुबां पर राधा-राधा नाम हो जाए। किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम हो जाए।