आइसोलेशन के लिए ट्रेन की बोगियों को किया तैयार
- फोटो : ANI
बरेली: आइसोलेशन वार्ड वाले कोच अब रेलवे की मुसीबत बनने लगे, नई ट्रेनों के संचालन में दिक्कत
प्रदेश सरकार की सहायता के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में बदले गए कोच में आठ महीने में एक भी कोविड मरीज भर्ती नहीं किया गया। अब कोरोना की दूसरी लहर होने से स्थानीय प्रशासन ये कोच हटाने का निर्णय नहीं ले पा रहा है। इससे सबसे अधिक दिक्कत रेलवे को हो रही है, कोच नहीं हटे तो ट्रेनों की संख्या बढ़ने पर उनके संचालन के लिए प्लेटफार्म खाली नहीं मिलेगा।
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वाराणसी: रेलवे ने ट्रेन को बदला आइसोलेशन कोच में, पर नहीं हो सका प्रयोग
कोरोना संक्रमण को देखते हुए आइसोलेशन के लिए रेलवे ने भी तैयारियां की थीं। शुरुआती दौर में जब अस्पतालों में बेड की कमी होने की आशंका हुई तो रेलवे ने ट्रेनों की कई रैक को आइसोलेशन कोच में बदलवाया। पूर्वात्तर रेलवे की ओर से जून में वाराणसी मंडल के दस स्टेशनों पर भी चिकित्सकीय सुविधाओं से लैस ग्यारह आइसोलेशन रैक लगाए गए।
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झांसी: धूल खा रहे आइसोलेशन कोच, 560 की क्षमता पर भर्ती नहीं हुआ एक भी मरीज
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए आठ महीने पहले तैयार किए गए 70 आइसोलेशन कोचों का अब तक इस्तेमाल नहीं हो सका है। दस कोचों की एक ट्रेन भी प्लेटफार्म पर खड़ी है, लेकिन यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं किया गया। लाखों रुपये खर्च कर तैयार किए गए ये कोच अब धूल खा रहे हैं। इन कोचों में 560 मरीज भर्ती किए जा सकते थे। उत्तर मध्य रेल प्रशासन ने बढ़ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या को देखते अप्रैल में झांसी, आगरा व प्रयागराज मंडल में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इनमें 70 कोच झांसी में तैयार किए गए थे।
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