राजधानी की मेट्रो परियोजना के लोगो में रूमी गेट के अक्स के बाद अब इसके चुनिंदा स्टेशनों की भी अपनी अलहदा पहचान होगी।
दरअसल लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) अमौसी से मुंशीपुलिया के बीच इस रूट पर पांच स्टेशनों को आइकॉनिक (सिग्नेचर) बिल्डिंग के तौर पर तैयार करेगा।
इन स्टेशनों के वास्तु की नकल भविष्य में नहीं की जा सकेगी। ये बिल्कुल चक गजरिया में बनाई जा रही सिग्नेचर बिल्डिंग की तर्ज पर होंगे। इनमें लखनवी धरोहरों को भी डिजाइन में शामिल किया जा सकता है।
इसमें रूमी गेट, इमामबाड़ा, घंटाघर जैसी इमारतों को भी लिया जा सकता है। साथ ही आधुनिकता का पुट भी इन स्टेशनों में होगा। फिलहाल ये पांच स्टेशन कौन से होंगे, ये तय नहीं किया गया है।
खूबसूरती के साथ लाभ पर भी जोर
एलएमआरसी की भूमि के अधिक से अधिक लाभकारी उपयोग और स्टेशनों को लखनऊ हेरिटेज के तहत डिजाइन कराने में ये बिजनेस कंसलटेंट काम आएंगे।
केंद्र सरकार की ओर से मेट्रो को लाभकारी बनाने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद में यह युक्ति विश्व बैंक के अधिकारियों और डीएमआरसी की सलाह के बाद आजमाई जा रही है।
इस काम के लिए डबल बिड सिस्टम (तकनीकी और वित्तीय) के तहत कंपनी का चयन किया जाएगा।
यह कंसलटेंट करोड़ों रुपये की इस परियोजना में किस तरह से उपलब्ध भूमि का कामर्शियल इस्तेमाल किया जाए, इसमें मदद करेगी।
लाभ के हर बिन्दु का रखा जाएगा ख्याल
स्टेशनों का व्यवसायिक इस्तेमाल कर के ही मेट्रो परियोजना लाभ कमाती है। ऐसे में यह लाभ किन स्रोतों से आए, इसका विचार शुरुआत में हो जाना बहुत जरूरी है।
स्टेशन बनेंगे तो उसमें कहां दुकान होनी चाहिए। कहां एटीएम। कहां पर रेस्टोरेंट और किस मेट्रो स्टेशन को ऊंचा कर के उसको कामर्शियल कांप्लेक्स के तौर पर भी विकसित किया जा सकता है।
ये सारे बिंदु बिजनेस कंसलटेंट ही तय करेगा। इसके अतिरिक्त बाकी भूमि जो एलएमआरसी के अंडर में होगी, उसके अधिकतम लाभ के उपयोग में भी इसी कंसलटेंट की सलाहें काम आएंगी।
अगले तीस साल तक मेट्रो की प्रापर्टी का अधिकतम व्यावसायिक इस्तेमाल की सलाह भी ये एजेंसी देगी।
इन कंपनियों में से एक का होगा चयन
- अर्न एंड यंग इंडिया लिमिटेड (लंदन)
- नाइट फ्रैंक इंडिया लिमिटेड
- फीडबैक इंडिया वेंचर्स लिमिटेड
- सीबीआरई (अमेरिका)
- जेएलएल (सिंगापुर)
- दारा शाह कंपनी(मुंबई)
- अर्बन मास ट्रांजिंट कंट्री(दिल्ली)
- एईकॉम लिमिटेड