मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के न्यौते पर सोमवार को उनके सरकारी
आवास पर शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल मिलने गया।
शिक्षकों ने उनके सामने
माध्यमिक व बेसिक शिक्षकों की 20 सूत्री मांगें रखीं। सीएम ने कहा है
मांगों पर कई चरणों में उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है। उचित मांगों पर
शीघ्र ही निर्णय किया जाएगा।
उप्र शिक्षक
महासंघ के आह्वान पर 18 दिसंबर को ज्योतिबा फुले पार्क में शिक्षकों के
प्रदर्शन में शिक्षक प्रतिनिधियों को सीएम से वार्ता का न्यौता दिया गया
था।
तय समय पर शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मुख्यमंत्री से मिलने
गया। प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि सीएम ने
शिक्षकों की मांगों पर तत्काल निर्णय का आश्वासन दिया है।
माध्यमिक
विद्यालयों के तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण, सीटी वेतनमान से प्रोन्नत
शिक्षकों को सेवाओं का लाभ देकर चयन व प्रोन्नत वेतनमान देने, एलटी वेतनमान
के शिक्षक को प्रोन्नत वेतनमान के लिए स्नातकोत्तर उपाधि की बाध्यता से
मुक्त करने की बात कही है।
साथ ही सरप्लस के नाम पर शिक्षकों पर छंटनी की तलवार लटकाए रखने को
अनुचित ठहराते हुए उनके वेतन भुगतान की प्रक्रिया को अवरोध मुक्त करने
संबंधी मांगों पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताई है।
उत्तर
प्रदेश शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष लल्लन मिश्रा ने बताया कि बेसिक शिक्षकों
की अधिकतर मांगों पर सहमति बन गई है। इस संबंध में शीघ्र ही आदेश जारी
करने का आश्वासन दिया गया है।
शिक्षा मित्रों के समायोजन पर भी शीघ्र ही
निर्णय का आश्वासन दिया गया है।
राजकीय शिक्षक संघ के सुनील कुमार भड़ाना
ने बताया कि राजकीय शिक्षकों की पदोन्नति सूची विभागीय साइट पर डालने और
जीपीएफ का भुगतान मंडल स्तर पर किए जाने पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताई है।
वार्ता के दौरान बेसिक शिक्षा मंत्री राम गोविंद चौधरी, माध्यमिक शिक्षा
राज्यमंत्री विजय बहादुर पाल, सचिव बेसिक शिक्षा नीतीश्वर कुमार, शिक्षा
निदेशक बासुदेव यादव भी उपस्थित रहे।
प्रतिनिधिमंडल में सभी शिक्षक विधायक
जगवीर किशोर जैन, हेम सिंह पुंडीर, देवी दयाल शास्त्री, सुभाषचंद्र शर्मा,
सुरेश कुमार त्रिपाठी, ध्रुव कुमार त्रिपाठी तथा पूर्व शिक्षक विधायक डॉ.
प्रमोद कुमार मिश्र शामिल थे।