शासन में सेहत विभाग के कुछ कर्मचारियों की मौज है तो कुछ का दर्द कि विभाग और शासन में अफसर अब माथा टेकने नहीं आते।
असल में पहले विभाग में जिलों से आने वाले अफसर और कर्मचारी परिक्रमा कर माथा टेकते थे। अब मंत्रीजी सक्रिय क्या हुए, जिलों से आने वाले अफसर और कर्मचारी न तो शासन की परिक्रमा करते हैं और न ही प्रसाद चढ़ाने आते हैं।
कर्मचारियों का दर्द है कि प्रसाद नहीं मिल रहा है तो आशीर्वाद कैसे मिलेगा। लिहाजा कुछ को शिकायत है कि अफसर अब सीधे ऊपर ही चले जाते हैं और उन्हें न तो भाव मिलता है और न ही प्रसाद, लेकिन कुछ कर्मचारियों की मौज है।
जब ट्रांसफर और प्रमोशन के आदेश जारी होने होते हैं तो वे इन्हें दबाकर बैठ जाते हैं। कभी-कभार आदेश जारी करने में एक-दो दिन लग जाते हैं ताकि इसकी पहली सूचना संबंधित अफसर को दी जा सके और उन्हें इनाम मिले।
अगर अफसर का घर राजधानी में हो तो कर्मचारी सीधे कह देता है कि साहब को ऑर्डर की कॉपी मैं दूंगा।