-डॉ. योगेश प्रवीण की पुस्तक लखनऊनामा के अनुसार इस मंदिर को सुगंधित द्रव्य विक्रेता लाला जाटमल ने 1783 में बनवाया था। मंदिर का मुख्य मंडप उसी समय बनकर तैयार हुआ था।
-गीता प्रेस गोरखपुर की ओर से प्रकाशित पुस्तक कल्याण के श्री हनुमान अंक में दर्ज तथ्यों के मुताबिक, 19वीं शताब्दी के आरंभ में नवाब शुजाउद्दौला की पत्नी आलिया बेगम की ओर से बसाए गए मोहल्ले अलीगंज में श्री हनुमान मंदिर है, जहां जेठ के प्रत्येक मंगल को होने वाले आयोजन में विभिन्न धर्मों के लोग शामिल होते हैं।
- किंवदंती है कि 1792 से 1802 के बीच अवध के तत्कालीन नवाब मुहम्मद अली शाह की बेगम रबिया बेगम को सपने में हनुमान जी ने दर्शन दिया था। कहा जाता है कि जब वह गर्भवती थीं तो फिर सपना देखा। बच्चे के जन्म के बाद वे स्वप्न में दिखाए गए स्थल इस्लामबाड़ी गईं और वहां खोदाई करवाई तो वहां मूर्ति मिली। जिस हाथी पर मूर्ति को लेकर लोग लौट रहे थे, वो अलीगंज पहुंच कर रुक गया और आगे बढ़ा ही नहीं। जैसे ही मूर्ति उतारी गई, हाथी चल पड़ा। वहीं, मौजूद एक साधु ने कहा कि बेगम साहिबा हनुमान जी गोमती पार नहीं जाना चाहते हैं। तब यहीं मूर्ति स्थापित कराई गई। तब गोमती अपनी वर्तमान स्थिति से हटकर अलीगंज के निकट बहती थी।