लखनऊ। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) भी नैक ग्रेडिंग वाले विश्वविद्यालयों की सूची में शुमार हो गया है। विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मूल्यांकन में ए ग्रेड मिला है। विश्वविद्यालय को चार में से 3.25 सीजीपीए मिला है। विश्वविद्यालय मात्र 0.1 नंबर से ए प्लस ग्रेड लाने से चूक गया।
नैक ग्रेडिंग मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन व उससे संबद्ध संस्थानों में ऑनलाइन कोर्स शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन मुख्य कैंपस के साथ-साथ अपने घटक संस्थानों में भी ड्रोन तकनीक, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आदि से जुड़े सर्टिफिकेट कोर्स ऑनलाइन चलाएगा। नैक ग्रेडिंग का फायदा विश्वविद्यालय के साथ-साथ छात्रों को भी मिलेगा।
एकेटीयू ने अपनी स्थापना के बाद (25 साल में) पहली बार राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) मूल्यांकन कराया। संबद्धता देने वाले विश्वविद्यालय के रूप में काफी लंबे समय तक चले एकेटीयू के सामने बड़ी चुनौती थी। किंतु विवि प्रशासन ने हाल में किए गए कार्यों, अच्छी अंतरराष्ट्रीय स्तर की लैब, संबद्ध संस्थानों की उपलब्धियों के आधार पर नैक में पहली बार में ए ग्रेड प्राप्त की है। विश्वविद्यालय प्रशासन अपना मूल्यांकन करने के बाद नैक में इसके रिवीजन के लिए भी जा सकता है।
ये भी होंगे फायदे
- विवि ऑनलाइन कोर्स चला सकेगा।
- शिक्षकों को मिल सकेंगे यूजीसी के प्रोजेक्ट।
- केंद्र सरकार की योजनाओं का भी मिलेगा लाभ।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवि को मिलेगी पहचान।
- राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग में मिलेगा फायदा।
ऑनलाइन कोर्स चलाएंगे, एनआईआरएफ-एनबीए भी
एकेटीयू कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने इसे सभी के सहयोग व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के कुशल मार्गदर्शन का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि राजभवन की ओर से लगातार बैठक करके एक-एक कमियों को दूर कराया गया है। हमारी टीम व संबद्ध संस्थानों ने भी बेहतर काम किया। सभी ने दिन-रात एक करके नैक में ए ग्रेड पाई है। ऑनलाइन कोर्स चलाने की अनुमति के साथ-साथ शिक्षकों व छात्रों को इसका काफी लाभ मिलेगा। एक संबद्धता देने वाले विवि के रूप में नैक कराना एक महत्वपूर्ण चुनौती थी। मैंने जॉइन करने के समय ही नैक कराने का वादा किया था। आगे हम एनआईआरएफ व संबद्ध संस्थानों के कोर्स का एनबीए भी कराएंगे।
ये रहीं विश्वविद्यालय के सामने चुनौतियां
एकेटीयू ने भले ही अपने पहले प्रयास में ही नैक की ए ग्रेड प्राप्त कर ली हो। किंतु उसके सामने चुनौतियां भी कम नहीं थीं। विवि के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सभी संबद्ध संस्थानों को साथ लेकर चलने की थी। विवि का मुख्य और घटक संस्थानों के कैंपस भी अलग-अलग थे। कुछ सालों में लगातार चल रही जांच की वजह से काफी काम भी प्रभावित चल रहे हैं। ऐसे में नैक के सामने खुद को प्रदर्शित करने की बड़ी चुनौती थी। मूल्यांकन के लिए भी संबद्ध संस्थानों में एकमत नहीं था। इसके लिए विरोध भी चल रहा था। इन सबके बीच विवि ने बेहतर परिणाम प्राप्त किया है।
यहां चूक गया विश्वविद्यालय
- संबद्धता देने वाले विवि के रूप में उपलब्धियां कम थीं।
- कमजोर रहा शोध से जुड़ा हुआ पक्ष।
- विवि व संस्थानों के पास प्लेसमेंट डाटा नहीं था।
- विवि व संस्थानों में नियमित शिक्षक अपेक्षाकृत कम थे।
- विवि व संस्थानों में आपसी सहयोग की कमी थी।
नैक टीम ने ये दिए थे सुझाव
सात सदस्यीय टीम ने एक्जिट बैठक में विवि प्रशासन को अपने यहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने, आईआईटी जैसे उच्च तकनीकी संस्थानों से समझौते बढ़ाने, आउटकम आधारित पठन-पाठन को बढ़ावा देने, लैब को और सुदृढ़ करने के सुझाव भी दिए। नैक की सात सदस्यीय टीम के दो सदस्य भौतिक और पांच सदस्य ऑनलाइन भ्रमण में शामिल हुए।