यूपी के सीएम अखिलेश यादव भी सिविल सर्विस एग्जाम में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
अखिलेश ने हिंदी व अन्य क्षेत्रीय भाषी छात्रों के भविष्य और संघ लोक सेवा आयोग के आईएएस एग्जाम में समानता की मूल भावना को ध्यान में रखते हुए सी-सैट प्रणाली पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
मोदी को लिखा खत, दी दलील
अखिलेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोमवार को एक खत लिखकर कहा है कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाने वाली प्रशासनिक सेवा परीक्षा में उत्तर प्रदेश से काफी तादाद में परीक्षार्थी सम्मिलित होते हैं, जिनकी मूल भाषा हिंदी है।
अखिलेश ने लिखा है कि वर्तमान में आयोजित परीक्षा पद्धति में सी-सैट के अंतर्गत जो प्रश्नपत्र हिन्दी/अन्य भाषाओं के माध्यम के परीक्षार्थियों को उपलब्ध कराए जाते हैं, उसमें मूलतः अंग्रेजी भाषा का रूपान्तरण सॉफ्टवेयर के द्वारा कर दिया जाता है।
इससे रूपान्तरण के बाद प्रश्न के मूल अर्थ में विसंगतियां उत्पन्न हो जाती है, जिसके कारण परीक्षार्थी के द्वारा उनका उत्तर देने में संशय की स्थिति उत्पन्न होती है।
टल भी सकती है परीक्षा
सी सैट मामले में अंतिम निर्णय लेने से पहले आगामी 24 अगस्त को होने जा रही यूपीएससी सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा को अगले आदेश तक टालने का फैसला किया जा सकता है।
मालूम हो कि इस संबंध में यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही गठित की गई कमेटी अगले हफ्ते सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
इस मुद्दे पर प्रतियोगी छात्रों के उग्र प्रदर्शन और विपक्ष के आक्रामक तेवरों के बीच रविवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह की वित्त मंत्री अरुण जेटली, पीएमओ में मंत्री जितेंद्र सिंह, डीओपीटी और यूपीएससी के अधिकारियों के साथ अहम बैठक हुई।
मामले ने लिया राजनीतिक रंग
राजनाथ के निवास पर हुई बैठक में इस मामले में बीच का रास्ता तलाशने पर बातचीत हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक में राजनाथ, जेटली और जितेंद्र तीनों ही यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा टालने के पक्ष में थे।
बैठक में यूपीएससी के अधिकारियों का कहना था कि अंतिम फैसला करने से पहले सरकार को इस संबंध में गठित कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। बैठक के बाद राजनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। समझा जाता है कि उन्होंने इस संबंध में यूपीएससी और डीओपीटी के अधिकारियों की राय से उन्हें अवगत कराया।
चूंकि इस मामले ने उत्तर भारत में राजनीतिक रंग ले लिया है, इसलिए भी सरकार इस विवाद का तत्काल हल निकालना चाहती है। मालूम हो कि सी सैट मामले में दिल्ली के साथ-साथ उत्तर भारत के अन्य शहरों में भी प्रतियोगी छात्र आंदोलनरत हैं। इस मुद्दे पर संसद में विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा है।