जौनपुर में डॉ. केपी यादव के सपा से निष्कासन और टिकट को लेकर हुई उठापटक
के बाद बदले हालातों पर पार्टी नेतृत्व गंभीर है।
पार्टी मुखिया मुलायम
सिंह यादव और अन्य नेताओं की पूरे हालात पर नजर है। बहुत संभव है कि
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव 13 जनवरी को जौनपुर जाएं।
यहां से पारसनाथ यादव
सपा प्रत्याशी घोषित किए जा चुके हैं लेकिन एक खेमा केपी और पारस के बीच
विवादों के मद्देनजर किसी अन्य नेता को प्रत्याशी बनाने के पक्ष में है।
जौनपुर
में सपा ने पहले डॉ. केपी यादव को लोकसभा सीट का प्रत्याशी घोषित किया था।
26 नवंबर को उनकी जगह उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री पारसनाथ यादव को
उम्मीदवार बना दिया।
इसके विरोध में केपी यादव ने पहले जनभावना यात्रा
निकाली और फिर पांच जनवरी को जनअदालत रैली तक निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान
कर दिया।
इससे ठीक दो दिन पहले उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था
इसके बावजूद उनकी सभा में ठीक-ठाक भीड़ जुटी। चूंकि जौनपुर सपा का मजबूत
गढ़ माना जाता है इसलिए पार्टी नेतृत्व हाल के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है।
परंपरागत वोटों के बंटवारे की आशंका के चलते डैमेज कंट्रोल की कोशिशें भी
हो रही हैं। बहुत संभव है कि 13 जनवरी को अखिलेश यादव जौनपुर के बदलापुर
जाएं। बदलापुर में ही केपी यादव ने रैली की थी।
मुख्यमंत्री स्थानीय
विधायक के निजी कार्यक्रम में शामिल होकर पार्टी नेताओं को एकजुटता का
संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं।
पार्टी
का एक खेमा यह प्रयास कर रहा है कि पारसनाथ और केपी यादव के बीच विवाद के
चलते बीच का रास्ता निकाला जाए। यह खेमा किसी तीसरे नेता का प्रत्याशी बनाए
जाने का पक्षधर है।
कुछ लोग प्रत्याशी के रूप में विधायक बाबा दूबे का नाम
भी उछाल रहे हैं। हालांकि पारसनाथ कद्दावर नेता हैं और सहमति के बिना उनका
टिकट कटना आसान नहीं माना जा रहा है।
सपा
के प्रदेश प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी का कहना है कि सपा
में किसी व्यक्ति के नहीं बल्कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के नाम पर वोट
मिलते हैं।
केपी यादव को लगातार अनुशासनहीनता के चलते निष्कासित किया गया।
उन्होंने जौनपुर में पूरी पार्टी की एकजुटता का दावा किया।