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दिल्ली के बाद निवेश जुटाने कनाडा जाएंगे अखिलेश

Mon, 16 Jun 2014 11:54 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपनी सरकार की ‘मिड टर्म’ परीक्षा का नतीजा देखने के बाद बिगड़े माहौल को बदलने के लिए निवेश जुटाने की कमान खुद संभाल ली है।
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जबकि पिछले साल उन्होंने यह काम नौकरशाही के भरोसे छोड़ दिया था। दिल्ली के निवेशक सम्मेलन के बाद मुख्यमंत्री अब कनाडा जाएंगे। वहां जुलाई में दिल्ली की तरह बड़े निवेशक सम्मेलन की योजना है।

अखिलेश यादव ने सत्ता में आने के बाद जनवरी 2013 में आगरा में ‘ग्लोबल पार्टनरशिप समिट’ का आयोजन कर यूपी को निवेश के लिए बेहतर स्थल बनाने की इच्छाशक्ति दिखाई थी। लेकिन यह मुहिम आगे नहीं बढ़ सका। क्योंकि वह निवेशकों के कार्यक्रमों से किनारा करते रहे।
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मुख्यमंत्री खुद नहीं लेते थे रूचि

मुख्यमंत्री ने तगड़ा प्रचार-प्रसार करवाकर चुनाव के ऐन पहले ई-यूपी का आयोजन करवाया, पर वह इसमें भी नहीं पहुंचे।

वहीं अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अफसरों की अदला-बदली ने सूबे में निवेश का माहौल कभी बनने ही नहीं दिया।

लेकिन लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को मिली करारी हार के बाद मुख्यमंत्री ने नौकरशाही में बड़े बदलाव करने के साथ ही निवेश जुटाने की कमान खुद ही संभाल ली।

इसकी शुरुआत 12 जून को दिल्ली के निवेशक सम्मेलन से हुई। सम्मेलन की कामयाबी के लिए मुख्य सचिव आलोक रंजन विभिन्न देशों के दूतावास के अफसरों से व्यक्तिगत भेंट कर उनकी उपस्थिति तय कराई तो मुख्यमंत्री ने पूरे समय मौजूद रहकर निवेशकों में भरोसा बढ़ाने का काम किया।

63 हजार करोड़ के निवेश की उम्मीद

सम्मेलन के जरिये प्रदेश में करीब 63 हजार करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद जगी है। लगभग 54 हजार करोड़ रुपये के 19 एमओयू पर हस्ताक्षर भी हो चुके हैं।

सम्मेलन में कनाडा, नीदरलैंड, तुर्की, पोलैंड, इटली व ताइपे आदि देशों के राजनयिकों की भागीदारी को खासा महत्व दिया जा रहा है।  अधिकारी बताते हैं कि मुख्यमंत्री अब इस मुहिम को मंद न पड़ने देने की योजना पर काम कर रहे हैं।

जुलाई में मुख्यमंत्री एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ कनाडा व अन्य यूरोपीय देशों की यात्रा की तैयारी कर रहे हैं। तो सितंबर में दिल्ली के निवेशक सम्मलेन की तर्ज पर मुंबई व नवंबर-दिसंबर के बीच दुबई में इनवेस्टर मीट की योजना है।

इस मुहिम को अगले साल फरवरी में आगरा में होने वाले ग्लोबल समिट के साथ पूरा किया जाएगा। इसके लिए पार्टनर चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अखिलेश से निराश हुए निवेशक

ई-यूपी- पिछले साल ई-यूपी में देशभर के सैकड़ों निवेशकों को यह कहकर बुलाया गया कि इसमें मुख्यमंत्री अखिलेश यादव स्वयं उपस्थित रहेंगे। पर, मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। इस पर निवेशकों ने निराशा जताई थी।

इन्वेस्ट नार्थ- सीआईआई हर साल इन्वेस्ट नार्थ का आयोजन करती है। इसमें राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर के  निवेशक जुटते हैं।

इसमें उत्तर भारत के राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया जाता है। वर्ष 2012-13 में इसका आयोजना गुड़गांव में और 2013-14 में दिल्ली में हुआ लेकिन मुख्यमंत्री दोनों ही कार्यक्रमों में नहीं पहुंचे।
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यहां भी नदारद रहे सीएम साहब

सीआईआई एआरएम- सीआईआई हर साल वार्षिक कार्यक्रमों (एआरएम) का आयोजन करती है। इसमें नौ राज्यों के सीआईआई प्रतिनिधि जुटते हैं। उद्यमियों से मुलाकात व निवेश संबंधी चर्चा के लिए यह अहम मौका होता है।

मौजूदा सरकार के कार्यकाल में दो एआरएम हुई लेकिन मुख्यमंत्री एक भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। यूएसआईबीसी का न्यौता- पिछले साल अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल का एक प्रतिनिधिमंडल लखनऊ आया था। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उनकी खूब मेहमाननवाजी की।

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें अपने वार्षिक अधिवेशन में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आमंत्रित किया। यही नहीं वहां उनका रोड शो भी कराने की बात कही। कई बड़े प्रोजेक्ट पर निवेश को लेकर चर्चा भी हुई।

मगर इसके पहले एक कार्यक्रम में अमेरिका जाने पर संसदीय कार्यमंत्री आजम खां की तलाशी हुई तो मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम से दूरी बना ली।
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