बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के शपथ ग्रहण समारोह से सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को बुलाया नहीं गया। वह इन दिनों इटावा में हैं हालांकि अखिलेश यादव ने ट्वीट कर दोनों को बधाई दी है। शपथ ग्रहण समारोह में अखिलेश का न जाना कई मामलों में अहम है। एक तरफ वह तेजस्वी यादव के रिश्तेदार हैं तो दूसरी तरफ केंद्र में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस खेमे की अगुवाई करने का भी दमखम भरते हैं। माना जा रहा था कि भाजपा से नाता तोड़ने के बाद नए सिरे से और नए समीकरण साध कर सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार शपथ ग्रहण समारोह में अखिलेश यादव को बुलाकर भविष्य की रणनीति के तहत संदेश देंगे।
पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कुछ ऐसा ही इत्तेफाक रखते हैं, लेकिन बिहार से बुलावा ही नहीं आया। ऐसे में मंगलवार को तयशुदा कार्यक्रम के तहत अखिलेश कन्नौज पहुंचे। वहां घर-घर झंडा अभियान का शुभारंभ किया। इसके बाद वह इटावा चले गए। बुधवार को उन्होंने इटावा और मैनपुरी के लोगों से मुलाकात की। इतना जरूर रहा कि अखिलेश यादव ने ट्वीट कर दोनों को बधाई दी।
समाजवादियों ने भाजपा को सबक सिखाया : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा कि देशवासी भाजपा की हर चाल को समझ रहे हैं। बिहार में हुआ नया बदलाव इसी समझ का परिणाम है। जल्द ही बिहार की तरह उत्तर प्रदेश की जनता भी भाजपा को उखाड़ फेंकेगी। समाजवादियों ने बिहार में भाजपा को सबक सिखाने का काम किया है। 9 अगस्त को अगस्त क्रांति की शुरुआत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा तिरंगा भुला देगी और हिंदू-मुस्लिम पर आ जाएगी। भाजपा ने अंग्रेजों से सीखा है तोड़ो और राज करो की नीति। भाजपा की इन साजिशों से जनता भली भांति परिचित हो चुकी है। तिरंगा अभियान के सहारे भाजपा आजादी के आंदोलन में अपनी कोई भूमिका न होने की शर्म छुपाने में लगी है। तिरंगा को वह बस इन दिनों राजनीतिक एजेंडा बना रही है। ब्यूरो