मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने नोटबंदी को लेकर एक बार फिर केंद्र पर तगड़ा हमला बोलते हुए कहा कि अभी तो पैसे में फंसाया है। आगे कहीं देश को ही न फंसा दें।
उन्होंने कहा कि नोटबंदी के फैसले से सभी वर्गों, खासकर किसानों के सामने जबर्दस्त संकट खड़ा हो गया है। इससे अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में शुक्रवार को लोक भवन में हुई कैबिनेट की बैठक में भी नोटबंदी का मुद्दा छाया रहा। कई मंत्रियों ने आम लोगों, किसानों, मजदूरों, गरीबों व महिलाओं को इससे हो रही परेशानियों का मसला उठाया।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिए बगैर कहा कि आपने बिना तैयारी के ही सब कुछ बदल दिया। अब तो पूरा देश कह रहा है कि आपने कोई तैयारी नहीं की थी। इसलिए केंद्र सरकार को सामने आना चाहिए और किसान, गरीब, मजदूर व महिलाओं की मदद करनी चाहिए।
दैवी आपदा नहीं, सरकार का बनाया हुआ संकट
अखिलेश ने कहा कि किसानों पर कोई दैवी आपदा नहीं आई है बल्कि ये केंद्र सरकार की ओर से जान-बूझकर पैदा किया गया संकट है। बोआई का समय है। खाद और बीज खरीदने की समस्या खड़ी हो गई है। अभी तो वे जैसे-तैसे काम चला रहे हैं क्योंकि राज्य सरकार ने ओलावृष्टि के समय उनकी मदद की थी।
इस बार अच्छी बारिश होने से अच्छी फसल की जो उम्मीद थी, उस पर भी पानी फिर गया है। अगर एक सप्ताह में बोआई नहीं हुई तो किसान के सामने कितना बड़ा संकट पैदा हो जाएगा?
किसानों को पुरानी करेंसी की छूट मिले
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने, नेताजी (मुलायम) और पार्टी ने भी कहा है कि कम से कम किसानों को 500 व 1000 रुपये के नोटों की छूट मिलनी चाहिए। जहां किसानों का सहकारी बैंकों से सीधा संपर्क है, वहां सहकारी बैंकों को भी लेन-देन की अनुमति दी जानी चाहिए। इन बैंकों में लेन-देन शुरू नहीं हुआ तो शाखाएं बंद हो जाएंगी।
इससे सहकारी बैंकों पर से लोगों का भरोसा उठ जाएगा। कैबिनेट ने भी केंद्र से किसानों की मदद व उनकी तकलीफ दूर करने का अनुरोध किया है।
'सबसे ज्यादा बुद्घिमान व बुद्घिजीवी भाजपा में ही'
कालेधन को लेकर पूछे गए सवाल पर अखिलेश ने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि सबसे ज्यादा बुद्धिमान व बुद्धिजीवी उन्हीं के दल में हैं। ऐसे लोग ही अगर परेशानी में डाल देंगे तो क्या होगा? हमारा तो सीधे-सीधे मानना है कि काले धन व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे, लेकिन किसानों की मदद होनी चाहिए।
नए नोटों से भ्रष्टाचार शुरू
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनने में आया है कि देश में कई जगह नए नोटों से भ्रष्टाचार शुरू हो गया है। अखबारों में यह तब पढ़ने को मिला जब पूरी खबरें नहीं आ रही हैं। अगर पूरी खबरें आने लगें तो क्या होगा।
आदमी तो दूर, मशीनें भी नए नोट लेने को तैयार नहीं
केंद्र की खिंचाई करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपको पता था कि कैसा नोट आने वाला है लेकिन एटीएम में उसके हिसाब से सुधार नहीं किया। आदमी को तो छोड़ दो, एटीएम मशीनें भी नए नोट नहीं स्वीकार कर रही हैं। फिर सवाल यह भी है कि एटीएम से मिल कितना रहा है?
बैंकों में नई करेंसी पहुंचने का लेखा-जोखा नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि कम से कम राज्य सरकार को तो यह जानकारी दी जाए कि किस बैंक और किस ब्रांच में नई करेंसी का कितना पैसा पहुंच गया है। अब तक यह जानकारी नहीं दी गई।
केंद्र सरकार आंकड़ा बताना चाहे तो लोकसभा या राज्यसभा में बता दे। आबादी के लिहाज से यूपी इतना बड़ा प्रदेश है। बैंक ज्यादा हैं, शाखाएं ज्यादा हैं। सरकार कह रही है कि 50 दिन में सब ठीक हो जाएगा, जबकि यह संभव ही नहीं है। करेंसी एक्सचेंज में छह महीना या एक साल से ज्यादा लगेगा।
बैंकों में स्थिति सामान्य होने के केंद्र के दावे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पर बहस हो सकती है, लेकिन लोगों की परेशानियां दिखाई दे रही हैं।
कारोबार प्रभावित तो अर्थव्यवस्था में पिछड़ेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर किसान बर्बाद हो गया, मजदूरों का नुकसान हो गया तो अर्थव्यवस्था के जो आंकड़े केंद्र सरकार बताती है, वह सब पीछे जाता हुआ दिखाई देगा।
रोजगार पर सबसे पहले असर पड़ेगा क्योंकि सबसे ज्यादा मजदूर हैं जो फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं जिन्हें हर दिन वेतन मिलता है। लघु एवं मध्यम उद्योग सबसे ज्यादा यूपी में हैं। हाथ से होने वाला सबसे ज्यादा काम यूपी में होता है। श्रमिकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। उनके पास काम नहीं रहा।
कारखाने बंद हो जाएंगे क्योंकि श्रमिकों को देने के लिए पैसा नहीं है। मंडियों में कारोबार ठप हो गया है। पैसे से ही कारोबार होगा। हम भी किसानों से धान खरीदना चाहें तो नहीं खरीद सकते। अगर हम अस्पताल और किसानों के लिए छूट मांग रहे हैं तो गलत क्या है?
बुआ को दोबारा समाजवादी सरकार बनने की तकलीफ
बसपा प्रमुख मायावती का नाम लिए बगैर मुख्यमंत्री ने कहा कि बुआ की तकलीफ सिर्फ इतनी है कि समाजवादी दुबारा सरकार बना रहे हैं। उन्होंने कुछ काम तो किया नहीं। बीजेपी के भी बड़े नेता आ रहे हैं, लेकिन उनके पास बताने के लिए एक भी काम नहीं है।
अमित शाह का नाम लिए बगैर कहा कि आजमगढ़ में बोलकर आ गए। बताएं तो आजमगढ़ में भाजपा की सरकार ने कौन-सा एक काम किया।
परिवार में कितना भी झगड़ा हो, पर चुनाव चिह्न साइकिल ही
परिवार में झगड़े के सवाल पर अखिलेश ने कहा कि परिवार व पार्टी में कितना भी झगड़ा हो, पर चुनाव चिह्न साइकिल है और रहेगी। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही उनकी रथयात्रा शुरू होगी जिसमें भीड़ दिखाई देगी। अभी जो लोग तमाम यात्राएं निकाल रहे हैं, उनके यहां भीड़ गायब है।
बर्खास्त समर्थकों की वापसी का मामला घर में उठाएंगे
यह पूछे जाने पर कि रामगोपाल यादव का निलंबन रद्द हो गया। क्या आपकी युवा टीम की भी बर्खास्तगी वापस होगी? अखिलेश ने कहा, जो बात घर में कहनी है, उसे बाहर नहीं कहेंगे। ये टीम वो टीम की परिभाषा मीडिया की हो सकती है। समाजवादियों की एक ही टीम है साइकिल वाली।
टाल गए मंत्रिमंडल विस्तार का सवाल
यह पूछे जाने पर कि रामगोपाल का निलंबन रद्द होने के बाद क्या बर्खास्त मंत्रियों की वापसी होगी? अखिलेश यह सवाल टाल गए।