उन्होंने कहा, लॉकडाउन के चलते बड़ी संख्या में कामगार अपने गांवों में आ गए हैं। उनके पास न तो काम-धंधा है और न खाने के लिए पैसे। तमाम परिवार एक जून की रोटी भी नहीं जुटा पा रहे हैं। नौजवानों की नौकरियां छूट गईं। भाजपा सरकार में बेरोजगारी का रिकार्ड बना है। नोटबंदी-जीएसटी के बाद लॉकडाउन ने उद्योगधंधो का भट्ठा ही बिठा दिया है। सरकार को किसानों, कामगारों, गरीबों और युवाओं के लिए राहत पैकेज की व्यवस्था करनी चाहिए।
राहत पहुंचाने के नाम पर धोखा दे रही भाजपा
सपा अध्यक्ष ने कहा, भाजपा राहत पहुंचाने के नाम पर भी धोखा दे रही है। तमाम संगठन और नागरिक स्वेच्छा से जो भोजन या खाद्य सामग्री दे रहे है आरएसएस और भाजपा कार्यकर्ता उसे अपनी ओर से दी गई राहत बता रहे हैं। ग्रामीण जनता तथा सड़कों से दूर रहने वाले गरीबों को फांकाकशी करनी पड़ रही है। राहत सामग्री के वितरण में भी भेदभाव और पक्षपात हो रहा है। गरीबों और भूखे लोगों के लिए भोजन सामग्री लेकर जा रहे सपा कार्यकर्ताओं को जगह-जगह रोका जा रहा है। यह लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा नहीं है।