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हार से सदमे में हैं अखिलेश, मुलायम-शिवपाल से कर सकते हैं समझौता!

Wed, 15 Mar 2017 03:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश, मुलायम व शिवपाल - फोटो : amar ujala
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सपा अब विधानसभा चुनाव में लगे तगड़े झटके से उबरने की कोशिश में है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बृहस्पतिवार को यहां पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई है। इसमें विधानमंडल दल का नेता चुनने के साथ ही चुनाव में हार के कारणों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
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वहीं, ये कयास लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश अपना सियासी वजूद बचाने के लिए चाचा व पिता से समझौता कर सकते हैं। मुलायम की भी यही इच्छा है कि शिवपाल-अखिलेश साथ आ जाएं।

हालांकि, सपा की करारी हार को लेकर शिवपाल यादव इशारे-इशारे में अखिलेश पर निशाना साध चुके हैं। ऐसे में सपाइयों की नजरें 16 मार्च को बुलाई गई बैठक पर लगी हैं।
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सपाइयों में उत्सुकता इस बात को लेकर भी है कि बैठक में सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव व शिवपाल यादव शामिल होंगे या नहीं। फिलहाल इन दोनों के बैठक में आने पर सस्पेंस बना हुआ है। हालांकि, शिवपाल खेमे के लोगों का कहना है कि अगर सम्मानजनक तरीके से बुलाया गया तो वह विधायकों की बैठक में शामिल हो सकते हैं।

नए सिरे से रणनीति बना सकती है सपा

अखिलेश यादव - फोटो : ANI
चुनाव नतीजे आने के बाद से अखिलेश यादव अपने भरोसेमंद नेताओं के साथ बैठकें करके हार के कारणों की समीक्षा में जुटे हैं। मंगलवार को भी अखिलेश जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट स्थित अपने दफ्तर पहुंचे और नेताओं के साथ बातचीत की।

सूत्रों का कहना है कि सपा नेतृत्व अब हार के झटके से उबरकर नए सिरे आगे बढ़ने की रणनीति बना रहा है। 16 को विधायकों की बैठक के बाद हारे हुए प्रत्याशियों और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करके फीडबैक लिया जाएगा और जहां कमियां रहीं उन्हें दुरुस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

भरोसेमंद सूत्रों की मानें तो मुलायम चाहते हैं कि अखिलेश और शिवपाल फिर एक साथ आकर पार्टी को आगे बढ़ाएं। माना जा रहा है कि दोनों के बीच पैदा हुई तल्खियां दूर करने के लिए जल्द ही उनकी तरफ से पहल भी हो सकती है।

होली पर अखिलेश और शिवपाल दोनों सैफई में थे लेकिन एक दूसरे से मिले तक नहीं। इससे भी कार्यकर्ताओं में यही संदेश जा रहा है कि रार अभी खत्म नहीं हुई है।

सियासी वजूद बचाने के लिए कर सकते हैं फैसला

विधानसभा चुनाव में एक तरह से सूपड़ा साफ हो जाने से अखिलेश सदमे में हैं। हालांकि, वह संयत दिखने की कोशिश तो कर रहे हैं लेकिन हार की निराशा उनके चेहरे पर साफ झलक रही है।

पार्टी में कयास लगाए जाने लगे हैं कि अपना सियासी वजूद बचाए रखने के लिए अखिलेश अपने पिता और चाचा के साथ फिर जा सकते हैं।

चुनाव से पहले पार्टी में छिड़े घमासान के दौरान अखिलेश ने कहा भी था कि वह सिर्फ तीन महीने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद लेना चाहते हैं। इसके बाद वह खुद मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष पद लौटा देंगे।

नाराज वरिष्ठ नेताओं की हो सकती है वापसी

सूत्रों के अनुसार, चुनाव नतीजों से अखिलेश यादव पर पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं को तरजीह देने का भी दबाव बढ़ गया है जिन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने दरकिनार कर दिया था।

अखिलेश ने बेनी प्रसाद वर्मा जैसे वरिष्ठ नेता के बेटे का टिकट काटकर उन्हें नाराज कर दिया। इसके अलावा मुलायम के करीबी कई अन्य नेता भी साइड लाइन कर दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इनकी वापसी हो सकती है।
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कतरे जा सकते हैं राम गोपाल के पर

- फोटो : amar ujala
पार्टी सूत्रों का कहना है कि अखिलेश ने पिता व चाचा से बगावत करके पूरा चुनाव राम गोपाल यादव की रणनीति के अनुसार लड़ा।

अखिलेश ने जब से मुलायम और शिवपाल के खिलाफ मोर्चा खोला तभी से राम गोपाल हमेशा उनके साथ खड़े थे। मुलायम भी कई बार कह चुके हैं कि राम गोपाल अखिलेश को बहकाने में लगे हैं और उनका भविष्य बर्बाद कर रहे हैं।

चुनाव में हार के बाद अगर अखिलेश मुलायम और शिवपाल के नजदीक वापस जाते हैं तो निश्चित तौर पर उन्हें राम गोपाल से दूरी बनानी होगी। इसलिए राम गोपाल के पर कतरे जा सकते हैं।
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