मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ‘किसी भी कीमत’ वाले अंदाज में बसपा दफ्तर व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के घर के सामने माल एवेन्यू का पुल बनवाकर मंगलवार को जनता को समर्पित कर दिया।
बमुश्किल 15 महीने में 42 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस फ्लाईओवर के लोकार्पण मौके पर सीएम ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को विशेष रूप से आमंत्रित किया था।
वह अपनी पत्नी व बेटे के साथ पुल के लोकार्पण मौके पर मौजूद थे। उन्होंने राजधानी के गोमतीनगर में 86 करोड़ की लागत से बने एक अन्य फ्लाईओवर का भी लोकार्पण किया।
दरअसल, समाजवादी पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद ही मुख्यमंत्री ने लोरेटो कान्वेंट चौराहे से तेलीबाग स्थित लखनऊ-दिलकुशा रेलखंड के समपार संख्या 214 पर चार लेन के फ्लाईओवर के निर्माण का ऐलान किया था।
बसपा ने अटकाए रोड़े
उम्मीद के मुताबिक बसपा की ओर से तत्काल इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आई। वजह, यह पुल बसपा के प्रदेश कार्यालय के ठीक सामने बनना था। और इससे न सिर्फ बसपा प्रदेश मुख्यालय बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के आलीशन घर की रंगत भी फीकी पड़नी थी। बसपा नेताओं ने राजनीतिक दुर्भावना से पुल बनवाने की बात कहकर विरोध जताया।
यहां तक कहा कि, यदि यातायात की समस्या के समाधान के लिए कोई पुल बनना चाहिए तो वह विक्रमादित्य मार्ग पर बनना चाहिए। इसी मार्ग पर सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का घर और समाजवादी पार्टी का प्रदेश मुख्यालय है। इसके बाद सीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए किसी भी कीमत यह पुल बनवाने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने 2013-14 के बजट में इस पुल के लिए जरूरी रकम का बंदोबस्त भी कर दिया। बीच में सेना की ओर से एनओसी को लेकर कुछ अड़चन आई तो इस समस्या का समाधान सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कराया।
15 महीने में पूरा हुआ निर्माण
नतीजा ये हुआ कि सालों तक लटके प्रोजेक्ट को देखने की आदी राजधानी की जनता के सामने करीब 15 महीने में ही यह पुल बनकर तैयार हो गया।
इस फ्लाईओवर के बनने से एक ओर से इस रेलवे समपार पर काफी देर तक लगने वाले जाम से लोगों को राहत मिली है तो फ्लाईओवर बनने के पहले मुख्य मार्ग से विशालकाय व भव्य नजर आने वाले बसपा मुख्यालय व पूर्व मुख्यमंत्री मायावती का आवास लोगों की आंखों से ओझल हो गए।