घर वालों के बीच टीपू तथा युवा समाजवादियों के बीच ‘भैया’ नाम से पहचाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को यहां बताया कि डिंपल का हाथ थामने के लिए उन्हें दादी का साथ व सहारा लेना पड़ा।
यह भी खुलासा किया कि इंजीनियर से राजनीति में आकर और उत्तर प्रदेश में अब तक के इतिहास में सबसे कम उम्र का मुख्यमंत्री बनने का रिकार्ड बनाने वाले अखिलेश उर्फ टीपू बचपन में आम बच्चों से अलग नहीं थे। वह कंपट के लिए पेड़ पर चढ़ जाते थे। नीचे तब उतरते जब उन्हें कंपट (टाफी) दे दी जाती।
उन्होंने एक सवाल पर कहा कि ‘हार्ड वर्क नेवर गोज इन वेन’ यानि मेहनत कभी बर्बाद नहीं जाती। सक्सेज का कोई शॉर्टकट नहीं होता। कोई भी कार्य करो उसका लक्ष्य जरूर तय करो। अखिलेश शनिवार को यहां इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में वेबसाइट ‘लल्लनटॉप’ के द्वारा आयोजित टॉक शो में हिस्सा ले रहे थे।
लाल समाजवादी टोपी लगाए पूर्व मुख्यमंत्री तय समय से कुछ देर से इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान पहुंचे लेकिन वहां मौजूद युवाओं ने उनका जबरदस्त स्वागत किया। अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे भी लगाए गए। सबका अभिभावदन स्वीकार करते हुए वह मंच पर पहुंचे और सामान्य शिष्टाचार के बाद उनसे सवाल-जवाब का दौर शुरू हुआ तो सबसे पहले एंकर ने उनसे देर से आने कारण पहुंचा तो उन्होंने बताया कि नेता जी के साथ मीटिंग में थे।
अखिलेश बोले, नेताजी ने दिया आशीर्वाद
एंकर ने पूछा वहां से क्या मिला? उन्होंने जवाब दिया कि आर्शीवाद। इसके साथ खट्टे-मीठे सवाल-जवाबा का दौर चला तो वहां मौजूद युवाओं ने हर जवाब पर जमकर तालियां बजायी।
तभी नीचे उतरुंगा
टीपू से अखिलेश यादव बनने के सफर से जब सवालों की शुरुआत हुई तो पता चला कि सैफई चौबुर्जियां गांव में जन्म लेने वाले अखिलेश का टीपू नाम वहां के प्रधान ने रखा था। इसी वार्तालाप में ये भी खुलासा हुआ कि वह भी आम बच्चों की तरह शरारत करते थे। पेड़ पर चढ़े टीपू को नीचे उतारने के लिए कंपट देनी पड़ती थी।
एक सवाल पूछा गया कि जिस स्कूल में पढ़ाई की वहां चीफ गेस्ट बनकर कैसा लगा? इस पर अखिलेश ने बताया कि सैनिक स्कूल और मिलिट्री स्कूल में अंतर है। वहां बहुत रगड़ा जाता है। अनुशासन और खाने-खेलने से लेकर पढ़ने और समय से हर काम करने का तरीका वहां से ही सीखा।
सही पकड़े हैं
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पढ़ाई से लेकर पत्नी डिम्पल यादव के साथ अफेयर के सवाल के जवाब भी अखिलेश ने दिए। एंकर ने पूछा, कैंट खेलने जाते थे? अखिलेश बोले,जहां उनका घर है, वहां कुछ कदम पर रेलवे क्रॉसिंग है। उसे पार करते ही कैंट शुरू हो जाता है। डिम्पल जी से वहीं मुलाकात हुई थी?
इस सवाल के साथ ही अखिलेश के चेहरे पर मुस्कान आ गई। बोले, सही पकड़ा आपने। यह पूछे जाने पर कि लड़की को कैसे प्रपोज किया जाए? अखिलेश ने कहा, हमारे जमाने में मोबाइल फोन, वॉट्सएप नहीं था। आज के जमाने के लड़के-लड़कियों के मोबाइल फोन छीन लो तो सब पता चला जाएगा।
बाइक, कार, साइकिल नहीं जिप्सी का क्रेज
मैसूर में इंजीनियरिंग की पढ़ायी करते समय जिप्सी लेने के शौक का भी अखिलेश ने खुलासा किया। उन्होंने कहा कि बाइक कार साइकिल नहीं मुझे जिप्सी का क्रेज था। जिप्सी ही उस समय सबसे अच्छी गाड़ी थी। इससे लगा कि माहौल कुछ और ही रहेगा।
डिंपल से शादी के मामले में पूछा गया कि क्या इसके लिए दादी का सहारा लेना पड़ा था। इस पर उन्होंने सहमति जतायी की दादी सबसे बुजुर्ग थी इसलिए उनसे मदद लेने का फायदा तो था ही। यह भी बताया कि नेताजी उस समय डिफेंस मिनिस्टर थे। इसलिए डिंपल के पिता को कर्नल अंकल कहकर मिलवाया था।