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यूपी सरकार ने पूरा किया एक और बड़ा चुनावी वादा

Sun, 13 Sep 2015 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सपा सरकार ने साढ़े तीन साल बाद ही सही,चुनावी घोषणापत्र का एक और प्रमुख वादा शनिवार को पूरा किया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने सरकारी आवास पर 17 दिवंगत वकीलों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये के चेक दिए। उन्होंने कहा कि वास्तव में इस पैसे को बहुत पहले बंट जाना चाहिए। इसमें देरी हुई, मगर अब शुरुआत हो गई है।
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इसके लिए ऐसा कार्पस फंड बनाया गया है जिसे कोई भी सरकार खत्म नहीं कर पाएगी। न ही फंड से मिलने वाली 5-5 लाख रुपये की रकम कोई घटा पाएगा, बढ़ा भले दे। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि अन्य दिवंगत वकीलों के आश्रितों को भी सरकार जल्द आर्थिक सहायता देगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नेताजी (मुलायम सिंह यादव) की रही हो या उनकी, वकीलों के लिए हमेशा आगे बढ़कर काम किया है। उन्होंने कहा कि संसाधन सीमित हैं, लेकिन एक ओर घोषणाओं को पूरा करने और दूसरी ओर विकास पर असर न पड़े, इसका ध्यान रखकर फैसले किए।
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तमाम ऐसे काम शुरू किए जिसके बारे में कोई दूसरी सरकार सोच भी नहीं सकती। इस मौके पर मंत्री राजेंद्र चौधरी व अपर महाधिवक्ता गौरव भाटिया, बुलबुल गोदियाल, अशोक पांडेय, मुख्य स्थायी अधिवक्ता लखनऊ संगीता चंद्रा, बार काउंसिल की उपाध्यक्ष मधुलिका यादव उपस्थित रहे। वहीं, उन्होंने हाईकोर्ट भवन पर भी दिए गए अपने निर्णय का जिक्र किया।

हाईकोर्ट भवन को नहीं बनने दिया पत्‍थरों का पार्क

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि न्यायपालिका के हक में उन्होंने कई और अहम फैसले किए हैं। जब वे सरकार में आए तो लखनऊ में बन रहे हाईकोर्ट भवन की डिजाइन देखी। तय किया कि इसे पत्थरों के पार्क की तरह नहीं, बल्कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के भवन जैसी भव्यता दिलाएंगे। इसके लिए आर्किटेक्ट बदल दिया।

अब कोई भी इसकी भव्यता देख सकता है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि वे रिकार्ड्स का डिजिटलाइजेशन कराना चाहते हैं। एक मिनट भी नहीं लिया, तत्काल मंजूरी दे दी।

इलाहाबाद में भी मेट्रो की उम्मीद बढ़ी
मुख्यमंत्री ने कहा कि इलाहाबाद को स्मार्ट सिटी बनाने की बात हो रही है, लेकिन वहां बिना टांसपोर्टेशन सिस्टम सुधारे ऐसा नहीं हो सकता। वे टांसपोर्टेशन सिस्टम की फि जिबिलिटी की स्टडी करा रहे हैं। रिपोर्ट आने पर वहां मेट्रो रेल चलाने पर भी विचार होगा। उनकी सरकार लखनऊ के अलावा वाराणसी व कानपुर सहित कई शहरों में मेट्रो को लेकर काम कर रही है।

केंद्र रायबरेली-इलाहाबाद सड़क वापस कर दे, हम बनवा देंगे

मुख्यमंत्री ने कहा, लखनऊ-इलाहाबाद के बीच रायबरेली तक फोर लेन है। लोग कहते हैं कि आगे फोर लेन नहीं दिया। हम मौजूदा और पिछले दोनों ही प्रधानमंत्रियों से आग्रह कर चुके हैं कि यदि इस सड़क को आप बनवा नहीं सकते तो स्टेट को वापस कर दीजिए। हम बनवा देंगे, पर अब तक कोई जवाब नहीं मिला।

‘उम्मीद के नायक’ फिल्म जारी
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में नेपाल की भूकंप आपदा व बचाव कार्यों पर आधारित लघु फिल्म ‘उम्मीद के नायक’ जारी की। कार्यक्रम में यह फिल्म दिखाई भी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि किस तरह यूपी ने नेपाल के आपदा पीड़ितों को सबसे पहले मदद पहुंचाई। उन्होंने फिल्मकार नवलकांत सिन्हा की सराहना की।
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इन्हें मिले 5-5 लाख के चेक

मालती तिवारी पत्नी स्व. रामकृष्ण तिवारी, सरस्वती चौरसिया पत्नी स्व. अनिल चौरसिया, ममता द्विवेदी पत्नी स्व. अजय कमार द्विवेदी, चंद्रकला चतुर्वेदी पत्नी स्व. बैकुंठनाथ चतुर्वेदी, कुसुम सिंह पत्नी स्व. दिनेश कुमार सिंह, प्रतिभा वाजपेयी पत्नी स्व.ओम नारायण वाजपेयी, अनवरी बेगम पत्नी स्व. सैयद मोहम्मद हादी, विशेषा सिंह पत्नी शत्रुघ्न सिंह, करुणा पांडेय पत्नी स्व. सूर्य मणि पांडेय, होशीला मौर्या पत्नी स्व. शिवाकांत मौर्या, सरोज तिवारी पत्नी स्व. लालजी तिवारी, प्यारी देवी पत्नी  स्व. लखन कुमार पटेल, अनुपमा त्रिपाठी पत्नी स्व. आशुतोष त्रिपाठी, अंजुम फि रदौस पत्नी स्व. मो. वसी सिद्दीकी, सीता श्रीवास्तव पत्नी स्व. अरविंद कुमार श्रीवास्तव, सैयद इमरान अहमद पति अंजुम इमरान, मंजू सिंह चौहान पत्नी स्व. देवेंद्र सिंह चौहान।

नौकरशाही पर यहां भी उठी अंगुली
मुख्यमंत्री के भाषण के बाद आभार जताने के लिए महाधिवक्ता को आवाज दी जा चुकी थी, पर माइक पर उनके साथ ही एक अन्य अधिवक्ता भी आ गए। अधिवक्ता ने नौकरशाही को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि 143 करोड़ रुपये पड़े हैं। अधिवक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। पता नहीं, अधिकारी मुख्यमंत्री को सही जानकारी क्यों नहीं दे रहे। आज और परिवारों को सहायता मिल सकती थी।

वकीलों के आश्रितों को 5-5 लाख की मदद देने वाली पहली सरकार
प्रदेश के महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह ने कहा है कि देश की यह पहली सरकार है जिसने दिवंगत वकीलों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये की सहायता देने की योजना बनाई। पहले 50-50 हजार रुपये दिए जाते थे जो अनिवार्य भी नहीं था। सूबे के साढ़े तीन लाख अधिवक्ता परिवारों के लिए सपा सरकार ने सबसे ज्यादा काम किया है। सूबे के अधिवक्ता ब्रांड एंबेस्डर की तरह काम करेंगे।
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