यशवंत सिन्हा ने कहा कि इस कानून के अभी नियम ही नहीं बने हैं तो इसे लागू कैसे किया जा सकता है? कानून में कहा गया कि बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लोगों का अगर धर्म के आधार पर उत्पीड़न हुआ है या फिर उनमें उत्पीड़न का डर है तो वह भारत में नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं पर आवेदकों का उत्पीड़न हुआ है इसे वह कैसे साबित करेंगे? इस पर कुछ नहीं कहा गया है। कानून के नियम बनाए बिना इसे लागू नहीं किया जा सकता।
वहीं, केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों पर कानून न लागू करने पर संविधान के उल्लंघन की दुहाई देने पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि इस समय कई राज्यों के राज्यपाल संविधान के नुमाइंदे के तौर पर नहीं बल्कि भाजपा नेता की तरह काम कर रहे हैं। क्या ये संविधान का उल्लंघन नहीं है?
उन्होंने कहा कि सीएए, एनआरसी और एनपीआर वर्तमान मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए लाए गए हैं। इनकी कोई आवश्यकता नहीं है। इन्हें वापस लिया जाना चाहिए।
यशवंत सिन्हा ने कहा हम तीन बिंदुओं पर इसका विरोध करते हैं-
- ये देश के संविधान के खिलाफ ही नहीं देश के मौलिक ढ़ाचे के खिलाफ है।
- इस कानून की आवश्यकता ही नहीं थी क्योंकि सरकार के पास पहले से ही अधिकार हैं कि वो जिसे चाहे नागरिकता दे। अर्थव्यवस्था की स्थिति से जनता का ध्यान हटाने के लिए ये कानून लाया गया है।
- इस कानून के नियम ही नहीं बने हैं इसलिए इसे लागू नहीं किया जा सकता है।
प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि केंद्र सरकार अब नोटबंदी की बात ही नहीं करती क्योंकि वो भी फेल हो गई थी। अब एक बार फिर से देश को लाइन में लगाने की कोशिश की जा रही है। हम नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर का विरोध करते हैं क्योंकि यह असांवैधानिक है।