इसके पहले, अयोध्या से आए किसानों ने कहा कि वहां प्राधिकरण किसानों से जमीन ले रहा है। उचित मुआवजा नहीं दे रहा है। पवन पांडे ने बताया कि किसान की जमीन को बगैर मुआवजा दिए लेने की बात कही जा रही है। किसान परेशान हैं। सरकार की जमीन लेकर पूंजीपतियों को दी जा रही है। पहले भी भूखंड लिया गया और गरीब किसानों से सस्ते में लेकर होटल के लिए महंगी कीमत पर दिया जा रहा है। किसान अयोध्या में विकास के खिलाफ नहीं है लेकिन कौड़ियों के भाव जमीन लेने के खिलाफ हैं। पहले ही हजारों बीघा ली गई जमीन खाली है। सौ फीसदी किसान लिखित में कह रहे कि हमें जमीन नहीं बेचनी जिस भाव में उद्योगपतियों को जमीन बेची जा रही है, उसी भाव में किसान से लें तो बेच देंगे। सौ से दो सौ साल से खेती कर रहे किसानों की जमीन नजूल की बताकर फ्री में ली जा रही है। उनके पास खतौनी भी है।
अयोध्या के राजीव तिवारी ने बताया कि मैं राम की धरती से आया पीड़ित हूं। आवास विकास ने आवासीय काम के लिए जमीन ली और बेच दिया। हमसे पांच लाख में खरीदी और 1.81 करोड़ में बेची। हमसे जबरन भूमि लेकर हमें भूमिहीन किया जा रहा है। रामजन्भूमि ट्रस्ट ने 22 गुना सर्कल रेट से कराया। 48 लाख बिस्वा के रेट पर रजिस्ट्री कराई।
पूजा वर्मा ने बताया कि अयोध्या की मूल निवासी हैं। कोरोना में पति की मौत हो गई। बीमा से मिले पैसे से जमीन खरीदी। आवास विकास बहुत कम कीमत में जमीन ले रहा है। कोई हमारी बात नहीं सुन रहा। बच्चों को कैसे पढ़ा सकूंगी। बेटी की शादी करनी है।
राम यादव ने बताया कि माया जमतरा में सरकार 2000 किसानों को उजाड़ रही है। नजूल बताकर जमीन ली जा रही है जबकि बैंक लोन देते हैं। अदालत में स्वीकार्य है। टेंट सिटी के नाम पर हमे उजाड़ा जा रहा है। हम बर्बाद हो जायेंगे।
अयोध्या के व्यापारी नेता रतन जायसवाल ने बताया कि मेरी जमीन भी आवास विकास जबरन ले रहा है। ये अत्याचार हो रहा है। पांच लाख बिस्सा के भाव पर लेकर करोड़ों में बेच रहा है। आवास विकास सारे नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहा है। उद्योगपति होटल वालों को जमीन बेची जा रही है। हम अयोध्या के मूल निवासी हैं। क्या हम अयोध्या में रोजगार नहीं कर सकते। भूमिहीन होने जा रहे हैं। हरिराम ने कहा कि हमारी समस्या इतनी विकराल हो गई है कि भुखमरी के कगार पर आ गए हैं। खड़ी फसल को रौंद दिया गया। यादव बाहुल्य इलाकों में खास तौर पर अत्याचार हो रहा है।