भाजपा के मुकाबले प्रदेश में कमतर आंकी जा रही सपा ने चुनावों के पहले भाजपा को तगड़े झटके देकर मोदी लहर को नकार दिया है।
चुनाव के कुछ ही दिन पहले आगरा के महापौर इंद्रजीत वाल्मीकि आर्य और भाजपा से सांसद रहे तेहपुर के डॉ. अशोक पटेल सपा में शामिल हो गए।
फतेहाबाद से बसपा विधायक छोटेलाल वर्मा का कुनबा भी सपा में शामिल हो गया।
कुछ समय पहले सपा छोड़ गए पूर्व विधायक संजय गर्ग बसपा को छोड़कर फिर समाजवादी हो गए।
मुख्यमंत्री ने दिलाई सदस्यता
इसी के साथ प्रमोशन में आरक्षण के जबर्दस्त पैरोकार अंबेडकर महासभा के अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल भी सभी को चौंकाते हुए सपा के पाले में खड़े हो गए।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इन सबको सदस्यता दिलाई। उन्होंने उम्मीद जताई कि इनके आने से पार्टी को काफी ताकत मिलेगी।
इस मौके पर राजधानी की टीले वाली मस्जिद के इमाम फजलुर्रहमान वायसी की मौजूदगी के बारे में पूछे जाने पर अखिलेश ने कहा कि ये पार्टी में नहीं शामिल हुए हैं पर पार्टी के पुराने समर्थक व मददगार हैं।
भाजपा में कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं
सपा में शामिल होने वालों में डॉ. पटेल व आगरा के महापौर इंद्रजीत ने भाजपा नेतृत्व पर कई आरोप लगाए।
कहा कि वहां कार्यकर्ताओं की पूछ नहीं है।पार्टी का नेतृत्व मनमाने फैसले करता है।
इसके विपरीत सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं का खयाल रखते हैं।
मोदी और भाजपा नेतृत्व ने समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटकर वोट हासिल करने की साजिश रची है।
बसपा का दलित प्रेम छलावा
विधायक छोटेलाल वर्मा के परिवार के लोगों ने कहा कि बसपा का दलित प्रेम छलावा है। मायावती चाहती हैं कि दलित हमेशा दलित ही बना रहे।
बसपा से सपा में आए संजय गर्ग ने भी मायावती के दलित प्रेम को ढकोसला बताते हुए कहा कि वह भटक गए थे।
पदोन्नति में आरक्षण के पैरोकार डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि वह तो बहुत पहले से मुलायम से प्रभावित रहे हैं।
पदोन्नति में आरक्षण पर अब उनके दृष्टिकोण पर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अब जिस पार्टी में हैं, उसकी नीतियों के साथ हैं।