अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें हैं। चर्चा है कि मंत्रिमंडल में एक-दो नए चेहरे शामिल और एक-दो लोगों को हटाया जा सकता है।
लोकसभा चुनाव से पहले हटाए गए एक-दो मंत्रियों की वापसी हो सकती है। कई मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी किया जा सकता है।
प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार की छवि सुधारने की मुहिम और मंत्रियों के कामकाज के आकलन के आधार पर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपनी टीम का एक बार फिर पुनर्गठन कर सकते हैं।
मंत्रिमंडल में चार पद खाली
मंत्रिमंडल में चार स्थान खाली चल रहे हैं। तीन मंत्री आनंद सिंह, मनोज पारस और नरेंद्र यादव लोकसभा चुनाव से पहले हटाए गए थे और तेजनारायण उर्फ पवन पांडेय चुनाव के बाद।
चुनाव बाद कई मंत्रियों के विभाग भी बदले गए हैं। ऐसी संभावना है कि मुख्यमंत्री रिक्त स्थानों को भर सकते हैं। कहा जा रहा है कि हटाए गए मंत्रियों में दो की वापसी हो सकती है। इनमें आनंद सिंह भी शामिल हैं।
उनके बेटे कीर्तिवर्धन सिंह को लोकसभा चुनाव में भाजपा का टिकट मिलने के बाद उन्हें कृषि मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया था।
हालांकि आनंद सिंह चुनाव में सार्वजनिक तौर पर अपने बेटे के प्रचार के लिए किसी मंच पर नहीं दिखाई दिए। यही मंत्रिमंडल में उनकी वापसी का आधार बन सकता है। मनोज पारस और पवन पांडेय भी पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं।
पहले भी हो चुका है विस्तार
अखिलेश यादव ने मंत्रिमंडल का पिछला विस्तार गत 24 जून को किया था। तब चार राज्यमंत्रियों को प्रोन्नत किया गया था और दो नए चेहरे शामिल किए गए थे।
प्रोन्नत होने वालों में मनोज पांडेय, इकबाल महमूद और महबूब अली थे जबकि शिवाकांत ओझा को कैबिनेट और यासर शाह को राज्यमंत्री बनाया गया था।
पिछले दिनों विभागों के फेरबदल में मनोज पांडेय और इकबाल महमूद का कद कम किया गया है और महबूब अली को माध्यमिक शिक्षा विभाग जैसा अहम महकमा दिया गया है।
अपनी जिम्मेदारी घटाएंगे मुख्यमंत्री
अब चर्चा है कि चुनाव से पहले ब्राह्मण चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किए गए मनोज पांडेय का कद फिर से बढ़ सकता है। महबूब अली के खिलाफ भी लामबंदी हुई है।
एक लॉबी उनका विभाग बदलवाने की कोशिश में है। मंत्रियों के विभागों में फेरबदल की भी चर्चाएं हैं। कहा जा रहा है कि तीन-चार कद्दावर मंत्रियों को मंत्रिमंडल के पुनर्गठन में झटका लग सकता है।
उनके विभाग बदलने की तैयारी है। दो-तीन विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है और एक-दो लोगों की मंत्रिमंडल से छुट्टी भी हो सकती है।
यह भी संभव है कि मुख्यमंत्री अपने कुछ विभाग दूसरे मंत्रियों को दे दें।