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UP: 80 से ज्यादा दर्जाधारी मंत्री बर्खास्त

Sun, 26 Oct 2014 03:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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सपा ने पार्टी में ‘गद्दारों’ को चिह्नित करने की कवायद शुरू कर दी है।
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इसके तहत अखिलेश सरकार ने शनिवार को बड़ा फैसला लेते हुए कुछ को छोड़कर ज्यादातर दर्जा प्राप्त मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया।

हालांकि बर्खास्त किए गए दर्जाधारी मंत्रियों की सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि 80 से ज्यादा नेताओं पर गाज गिरी है।

गौरतलब है कि सरकार ने सौ से ज्यादा नेताओं को विभिन्न निगमों व विभागों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष तथा सलाहकार बनाकर मंत्री का दर्जा दे रखा है।

सरकार की इस सख्त कार्रवाई में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, राज्य महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, चयन आयोग व भर्ती बोर्ड, संवैधानिक संस्थाओं व आयोगों समेत करीब एक दर्जन संस्थानों के दर्जाधारियों की कुर्सी ही बच सकी है।

विवादित चेहरों से भी पाया छुटकारा

सपा के एक प्रमुख नेता और दर्जाधारी नेता जो कुछ बताते हैं, उससे भी सपा सरकार का यह फैसला रणनीतिक और विधानसभा चुनाव 2017 की तैयारी का हिस्सा नजर आता है।

उनके मुताबिक, बीच में सपा ने इसलिए लोगों को नहीं हटाया कि अभी उपचुनाव होने हैं। इसलिए ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिसका नुकसान हो।

स्वाभाविक था कि इन्हें हटाने से न सिर्फ हटने वाले बल्कि इनके समर्थक भी नाराज होते। अब सपाई यह कह सकते हैं कि उसने मजबूरी में लोगों को हटाया है क्योंकि न्यायालय में जवाब देना है।

साथ ही पार्टी ने तमाम कार्यकर्ताओं के बीच यह माहौल बनाने की कोशिश की है कि उन्हें भी मौका मिल सकता है। निश्चित रूप से सपा को इससे कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने का मौका मिलेगा।

विवादित चेहरों को हटाकर सपा ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि मर्यादा का उल्लघंन करने वाले और लोगों पर रुतबा गांठने वाले लोग पसंद नहीं है।

हटाने की वजह कहीं अदालत तो नहीं

पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने जिस तरह से गद्दारी का मुद्दा उठाया था उससे इस तरह की कार्रवाई तय मानी जा रही थी।

जानकारों का कहना है कि मिशन 2017 की तैयारियों में जुटी सपा ने दर्जाधारी मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाकर यह साबित करने की कोशिश की है कि पार्टी विरोधी काम करने वालों के साथ वह किसी तरह की रियायत बरतने के मूड में नहीं है।

लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद इसी साल मई में भी सरकार ने 36 दर्जाप्राप्त मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था।
हालांकि बाद में इनमें से कई फिर से कुर्सी से नवाज दिया गया था।

भारी संख्या में पार्टी नेताओं को दर्जाधारी मंत्री बनाकर लालबत्ती देने पर पर हाईकोर्ट भी सवाल उठा चुका है।

इसके बाद राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इस मामले को वापस हाईकोर्ट के सिपुर्द कर दिया था।

हाईकोर्ट में अब 21 नवंबर को इसकी सुनवाई भी होनी है। सरकार के इस कदम को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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इनकी कुर्सी बची

नवीन चंद्र वाजपेयी : उपाध्यक्ष राज्य योजना आयोग
डॉ. गोपाल दास नीरज : अध्यक्ष उ.प्र. भाषा संस्थान
उदय प्रताप सिंह : कार्यकारी उपाध्यक्ष उ.प्र. हिंदी संस्थान
सुनील जोगी : अध्यक्ष हिंदुस्तानी अकादमी, इलाहाबाद
तारकेश्वर मिश्र : अध्यक्ष यूपी एग्रो
जावेद आब्दी : अध्यक्ष प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
फरजंद अहमद : सलाहकार व्यावसायिक शिक्षा परिषद
ब्रिगेडियर आर.डी. सिंह : अध्यक्ष, भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम
नवाज देवबंदी : चेयरमैन उर्दू अकादमी
अध्यक्ष, उद्यमिता विकास संस्थान
उ.प्र. अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग
राज्य महिला आयोग
अल्पसंख्यक आयोग
चयन आयोग/ भर्ती बोर्ड
संवैधानिक संस्थाएं/ आयोग
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