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Mango Diplomacy : आम की दावत के बहाने अखिलेश का सियासी दांव, अरसे बाद दिखे आजम के साथ

Fri, 14 Jul 2023 05:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

उन्होंने ''डैमेज कंट्रोल'' शुरू कर दिया है। अखिलेश जिस तरह से लाव-लश्कर के साथ दो दिन पहले पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां के साथ मलिहाबाद में आम की दावत में पहुंचे थे, उसे लेकर सियासी गलियारों में उनकी ''मैंगो डिप्लोमेसी'' की खूब चर्चा है।
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सियासी दावत में अखिलेश और आजम.... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुस्लिम समुदाय को साधने की दूसरे दलों की कोशिशों के बीच सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव सतर्क हो गए हैं। उन्होंने ''डैमेज कंट्रोल'' शुरू कर दिया है। अखिलेश जिस तरह से लाव-लश्कर के साथ दो दिन पहले पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां के साथ मलिहाबाद में आम की दावत में पहुंचे थे, उसे लेकर सियासी गलियारों में उनकी ''मैंगो डिप्लोमेसी'' की खूब चर्चा है। हालांकि सपा के लोग इसे सामान्य बात मान रहे हैं, लेकिन आजम खां के साथ अखिलेश की मैंगो पार्टी ''दावते आम'' थी या ''दावते सियासत'' यह चर्चा का विषय है।

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आम के बहाने अरसे बाद आजम खां की सिक्रयता सपा को सुकून देने वाली है। इस समय सभी दलों में मुस्लिम सियासत को लेकर अधिक सक्रियता देखने को मिल रही है। सपा, बसपा व कांग्रेस के साथ ही भाजपा तक मुस्लिम वर्ग को साधने में जुटी है। वही, सियासी गलियारों में मुस्लिम समुदाय के कांग्रेस की तरफ झुकाव बढ़ने की अटकलें शुरू हो गई है। इस तरह की अटकलों से सपा खेमे में बेचैनी दिख रही है। 

खास तौर से पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपने बेस वोट बैंक को सहेजने को लेकर चिंता सताने लगी है । मुस्लिम सियासत का बड़ा चेहरा होने नाते आम चुनावों में सपा को आजम की सिक्रयता का लाभ मिल सकता है। हाल ही में जब भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर पर हमला हुआ तो आजम ने उनका हालचाल लिया था।
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माना जा रहा है कि इसके तहत ही अखिलेश किसी न किसी बहाने यह संदेश देना चाहते हैं कि मुस्लिम समुदाय आज भी सपा के साथ वैसे ही मजबूती से खड़ा है। इसी कड़ी में उन्होंने पार्टी में सबसे प्रभावशाली माने जाने वाले मुस्लिम चेहरे आजम खां के साथ आम खाने पहुंचे थे। आम खाने के बहाने अखिलेश ने आजम के नाराज होने की चर्चाओं को भी विराम देने की कोशिश की है।

अकेले में भी कर रहे मुलाकात
सूत्रों की माने तो अखिलेश इन दिनों मुस्लिम नेताओं से मेल-मुलाकात बढ़ा दिया है । वह एक-एक करके पार्टी के पुराने नेताओं के अलावा उन मुस्लिम नेताओं से भी अकेले में मिल रहे है, जिनके असंतुष्ट होने की बात कही जा रही है। अखिलेश इस पहल को भी मुस्लिम वोट बैंक को सहेजने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है । सूत्रों का कहना है कि खास तौर पर पार्टी से जुड़े पश्चिम के मुस्लिम नेताओं पर अखिलेश की खास नजर है।

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