राज्य सरकार ने 100 एकड़ तक भूमि अधिग्रहीत करने का अधिकार जिलाधिकारियों को दे दिया है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है।
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने जून में ‘भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम-2013’ के प्रावधानों को लागू करने की मंजूरी दी थी।
इसमें सबसे अहम फैसला जिलाधिकारियों को 100 एकड़ तक जमीन अधिग्रहण का अधिकार देने की बात रही। पहले भूमि अधिग्रहण की पूरी कार्यवाही शासन स्तर पर होती थी।
इसी तरह कमिश्नर से लेकर तहसीलदार तक की जिम्मेदारी तय की गई है। इससे उन परियोजनाओं को रफ्तार मिलने की उम्मीद हैं जिनको आगे बढ़ाने के लिए 100 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
ये प्रमुख व्यवस्थाएं हुई लागू
1- डीएम अब 100 एकड़ तक जमीन अधिग्रहीत करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होंगे। इसके लिए सरकार से इजाजत नहीं लेनी होगी।
2- डीएम के आदेश पर एडीएम भूमि अध्याप्ति, विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी व उप भूमि अध्याप्ति अधिकारी जिलाधिकारी के अधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।
3- मंडल स्तर पर मंडलायुक्त पुनर्वासन व पुनर्व्यवस्थापन आयुक्त कहलाएंगे।
4- उपजिलाधिकारी तहसीलों के पुनर्वासन व पुनर्व्यवस्थापन प्रशासक होंगे।
ये भी बदलाव होंगे
5- 100 एकड़ या इससे अधिक के भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के क्रियान्वयन व प्रगति की समीक्षा के लिए डीएम की अध्यक्षता में पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति होगी।
6 - राज्य स्तर पर पुनर्वासन व पुनर्व्यवस्थापन योजनाओं के क्रियान्वयन की मॉनीटरिंग केलिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति होगी।
7 - पुनर्वासन व पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में पीठासीन अधिकारी की नियुक्ति हाईकोर्ट की सहमति लेकर की जाएगी।