कभी युवाओं को लुभाने के लिए लैपटॉप वितरण योजना का प्रारम्भ करने वाली अखिलेश सरकार ने इस योजना को बंद करने के लिए अजीब तर्क गढ़ा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि आज प्रदेश के सभी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा दी जा रही है, अतः युवाओं को अब लैपटॉप की कोई जरूरत नहीं है। अब ई-बुक और ई-लाइब्रेरी को बढ़ावा दिया जाएगा।
हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि युवाओं के सहारे विधानसभा चुनाव में सत्ता के शिखर तक पहुंचने वाली सपा का अब उससे मोह भंग होता दिख रहा है।
लैपटॉप, बेरोजगारी भत्ता व कन्या विद्याधन जैसी युवाओं को लुभाने वाली योजनाएं भी उसे लोकसभा चुनाव में फायदा नहीं दिला सकीं तो उसने इन योजनाओं को बंद करना ही मुनासिब समझा।
हालांकि, तर्क तो यह दिया जा रहा है कि पहले दो सालों में युवाओं पर पूरा ध्यान दिया गया और अब दूसरे चरण में विकास कार्यों पर फोकस होगा।
कभी इन्हीं योजनाओं पर था नाज़
सपा ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में युवाओं को ध्यान में रखकर घोषणा पत्र तैयार किया। सत्ता में आने के बाद युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने युवाओं से वादा पूरा करने में तेजी भी दिखाई।
एक-एक कर धड़ाधड़ युवाओं के लिए योजनाएं शुरू की गईं। लैपटॉप, कन्या विद्याधन, बेरोजगारी भत्ता, मुफ्त टैबलेट देने जैसी योजनाएं शुरू की गईं।
प्रदेश के विकास का पैसा इन योजनाओं पर पानी की तरह बहाया गया। सपा सरकार को लगा कि इन योजनाओं का उसे लोकसभा चुनाव में खूब फायदा मिलेगा।
उसने चुनावी सभाओं में इसका खूब प्रचार भी किया। यहां तक कि अंग्रेजी का विरोध करने वाले सपा मुखिया मुलायम सिंह ने भी इन योजनाओं की तारीफ के पुल बांध डाले।
खूब किया प्रचार
मुलायम ने तो यहां तक कहा कि देश के अन्य किसी राज्य में युवाओं के लिए ऐसी योजनाएं नहीं हैं। सपा सरकार को लगा था कि कोई साथ दे या न दे, लेकिन युवा वर्ग उनका साथ जरूर देगा।
मगर ऐसा नहीं हुआ, लोकसभा चुनाव में उसे करारी हार का सामना करना पड़ा।
कहते तो हैं कि युवाओं के लिए शुरू की गई योजनाओं को बंद करने का मुख्य कारण भी यही है, पर सीधे तौर पर इसे मुख्यमंत्री कैसे स्वीकार कर सकते हैं। इसीलिए बहाना अब विकास का लिया जा रहा है।
इन पर पानी की तरह बहाया पैसा
लैपटॉप योजना
इंटर पास छात्र-छत्राओं को उच्च शिक्षण संस्थाओं में दाखिला लेने पर मुफ्त लैपटॉप देने की योजना वर्ष 2012 में शुरू की गई थी। वित्तीय वर्ष 2012-13 में 2418 करोड़ और 2013-14 में भी 2418 करोड़ रुपये की बजट में व्यवस्था की गई।
जिस साल योजना शुरू की गई उस साल 23,31,230 छात्र-छात्राओं ने इंटर की परीक्षा पास की, मगर लैपटॉप सिर्फ 14.08 लाख को ही बांटा गया। एक लैपटॉप 19,060 रुपये का खरीदा गया।
बेरोजगारी भत्ता
हाईस्कूल पास 25 से 40 वर्ष की आयु वाले को रोजगार पाने तक बेरोजगारी भत्ता देने का निर्णय लिया गया था। इस योजना में प्रति माह 1000 रुपये देने की शुरुआत वर्ष 2012 में की गई।
इस योजना का लाभ पाने के लिए रोजगार कार्यालयों में पंजीकरण कराना अनिवार्य था। पंजीकरण के बाद 12,61,524 युवाओं को पात्र पाया गया। इसमें से 12,61000 युवाओं को बेरोजगारी भत्ता दिया गया। इस पर 13,91,74000 रुपये खर्च हुए।
28 जिलों में मिला ही नहीं कन्याविद्याधन
इंटर पास छात्राओं को कन्या विद्याधन योजना की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी। पहले साल 2.93 लाख छात्राओं को कन्या विद्याधन 30 हजार रुपये के हिसाब से बांटा गया।
वर्ष 2013-14 में इसे घटाकर 20 हजार रुपये करते हुए 4,45,499 छात्राओं को बांटने का लक्ष्य रखा गया।
इसके लिए 543.6 करोड़ की व्यवस्था की गई। मगर लाभ 37,990 छात्राओं को ही मिला। प्रदेश के 28 जिलों में कन्या विद्याधन बांटा तक नहीं गया।
भत्ता नहीं, समाजवादी पेंशन योजना
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लैपटॉप, बेरोजगारी भत्ता और कन्या विद्याधन योजना बंद करने के बाद कहा कि अब विकास पर सारा ध्यान होगा। सड़क, सेतु, सिंचाई और ऊर्जा को बढ़ावा दिया जाएगा।
कहा कि पहले दो साल नौजवानों के भविष्य को संवारने तथा उज्ज्वल बनाने के लिए थे। लैपटॉप, बेरोजगारी भत्ता और कन्या विद्याधन योजनाओं का लाभ प्रदेश के युवाओं को मिला। सपा सरकार का प्रयास था कि बदलते युग की युवाओं को जानकारी दी जाए और हम इसमें सफल रहे।
बेरोजगारी भत्ता के स्थान पर समाजवादी पेंशन योजना शुरू की जा चुकी है।
इस योजना में 40 लाख लोगों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में अब सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से निर्धन बस्तियों में जीवन की आधारभूत तथा मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने, प्रदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए काम करेगी।