मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा विधानसभा में रामचरित मानस की चौपाई की व्याख्या के बाद अब नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को उठाया है। हालांकि इस मुद्दे को सियासत गरमाने के बाद अखिलेश ने नरम रूख दिखाते हुए कहा है कि वह रामचरित मानस के विरोधी नहीं है। भागवान किसी एक के नहीं हैं, बल्कि वे सबके हैं। उन्होंने कहा कि फिर भी जो गलत है, उसे गलत कहना चाहिए। मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए शुद्र और ताड़न के अर्थ से असहमति जताते हुए अखिलेश ने कहा कि यह वही शुद्र हैं जो आपका साथ न दिए होते तो शायद आप सत्ता में न आते।
विधानसभा में बजट पर मंगलवार को हो रही चर्चा में भाग लेते हुए अखिलेश ने शुद्र का अपमान करना गलत है, क्योंकि शुद्र होना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने अपनी धार्मिक प्रतिबद्धता को बताते हुए अखिलेश ने कहा कि पिछले दिनों में हम गोमती नदी के किनारे एक संत से मिलने गए थे, लेकिन सरकार के इशारे पर कुछ लोगों ने हमे काला झंडा दिखाकर विरोध किया। हमें धोती पहने बगैर परिक्रमा करने से रोक रहे थे, लेकिन हमने परिक्रमा पूरी की।
जातीय व्यवस्था पर सरकार को घेरते हुए अखिलेश ने कवि दिनकर की कुछ कविताओं में कर्ण जैसे कई योद्धाओं की उदाहरण देते हुए कहा कि जाति व्यवस्था की लड़ाई तो 5000 वर्ष से पहले चली आ रही है। आगे भी यह लड़ाई चलती रहेगी। उन्होंने कहा कि हम उस व्यवस्था का विरोध करते हैं, जिसमें एक मुख्यमंत्री के जाने के बाद दूसरा सीएम आये तो आवास को गंगा जल से धुलवाया जाए। इस मौके पर अखिलेश ने सरकार के बजट को किसान और नौजवानों का विरोधी बताते हुए भाजपा के संकल्प पत्र में शामिल उन वादों का भी उल्लेख किया, जिसे अब तक पूरा नहीं किया जा सका है।
वन ट्रिलियन अर्थव्यवर्था बनाने में हम भी दे सकते हैं साथ
सरकार द्वारा पेश बजट के बारे में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि योगी सरकार का यह सातवां बजट है। इसमें निवेश से लेकर रोजगार तक के सारे दावे हवा-हवाई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के हवाले से प्रदेश की आर्थिक स्थिति को खराब बताते हुए उन्होंने कई आंकड़े भी गिनाए। उन्होंने कहा कि सरकार एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का सपना देख रही है, लेकिन इस सपना को पूरा करने के लिए आर्थिक दर और जीडीपी का विकास दर 34 प्रतिशत ले जाना होगा। जो संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017-18 के मुकाबले 2021-22 में विकास दर में 5 प्रतिशत से अधिक कमी आई है। उन्होंने कहा सरकार यदि सही दिशा में प्रयास करे तो हम भी साथ देने के तैयार हैं, लेकिन सरकार के सभी काम हवा में हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 28 राज्यों में यूपी की रैंकिग सबसे खराब है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपना आर्थिक सलाहकार बदल देना चाहिए, जो 34 प्रतिशत तक विकास दर ले जाने का सपना दिखा रहा है।
56 नहीं, 5 एसडीएम यादवों का हुआ था चयन
नेत सदन द्वारा लगाए गए एसडीएम के पद पर 86 में से 56 पदों पर एक ही जाति का चयन होने के आरोप के जवाब में अखिलेश ने आंकड़ा पेश किया। उन्होंने कहा कि नेता सदन ने जाति का नाम भले ही न लिया हो, पर मैं बता रहा हूं कि 2011 में हुए चयन में 30 में से 5 एडीएम यादव जाति के चयनित हुए थे। इसी प्रकार 2012 में 4, 2013 में 6 और 2015 में 3 यादव एसडीएम के पद पर चयनित हुए थे। उन्होंने सरकार से 56 लोगों की सूची सदन में रखने की भी मांग दोहराई।
जातीय जनगणना से ही होगा सबका विकास
अखिलेश ने जातीय जनगणना पर सभी विपक्षी दलों का समर्थन मांगते हुए कहा कि जबतक जातीय जनगणना नहीं होगी, तब तक सबका साथ, सबका विकास नहीं हो सकता है। तभी बराबरी का सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जातीय जनगणना के खिलाफ है तो उसे आऊट सोर्स की व्यवस्था भी समाप्त कर देनी चाहिए।
छुट्टा जानवरों मरने वाले के परिजनों को दी जाए 10 लाख का मुआवजा
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश छुट्टा पशुओं की वजह से होने वाली घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इस समय 11 लाख से अधिक पशु सड़क पर घूम रहे हैं। उन्होंने सरकार छुट्टा पशुओं के हमले में मारे गए मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग करते हुए मृतको सूची भी सदन के पटल पर रखा।
हम भी चाहते तो बाप के अपमान के आरोप का जवाब देते
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बाप का सम्मान न करने संबंधी बयान का जवाब देते हुए अखिलेश ने यह परंपरा ठीक नहीं है। सदन में ऐसा आचरण नहीं होना चाहिए। ऐसे शब्दों का प्रयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा होगा तो दूसरा भी जवाब दे सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर इशारा करते हुए कहा कि आपने भी तो कई परंपराओं का निर्वाह नहीं किया है। हम भी चाहते तो बहुत कुछ कह सकते थे, लेकिन नेताजी (मुलायम सिंह) ने हमें ऐसी शिक्षा नही दी है।
उन्होंने कहा कि जिस इत्र व्यापारी के छापा पड़ा था वह भाजपाई थाकानपुर में इत्र व्यापारी के छापे की कार्रवाई की जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि जिस इत्र व्यापारी के छापा पड़ा था, उसका सपा को कोई संबंध नहीं था। वह भाजपा का कार्यकर्ता था। भाजपा ने सपा को बदनाम करने के लिए इसका खूब प्रचार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेस से ही सत्ता में आने पर विपक्ष के यहां छापा मारने की कार्रवाई करना सीखा है।