एनबीआरआई में आयोजित 9वें प्रो. केएन. कौल स्मृति व्याख्यान।
लखनऊ। भविष्य की खेती केवल अधिक उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उसे जलवायु परिवर्तन का सामना करने वाली, किसानों की आय बढ़ाने वाली और पर्यावरण के अनुकूल भी बनना होगा। आईसीआरआईसैट के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि आधुनिक तकनीकों और शोध के सहारे ही भारत की कृषि को इस दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है।
एनबीआरआई में शनिवार को आयोजित 9वें प्रो. केएन. कौल स्मृति व्याख्यान में डॉ. पाठक ने कहा कि पिछले सात दशकों में भारत का खाद्यान्न उत्पादन करीब सात गुना बढ़ा है और देश खाद्य अधिशेष राष्ट्र बन चुका है। हालांकि बढ़ती आबादी, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का क्षरण और बदलते वैश्विक हालात कृषि के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीनोम एडिटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ड्रोन, रोबोटिक्स, रिमोट सेंसिंग और प्रिसिजन एग्रीकल्चर जैसी तकनीकें खेती को अधिक उत्पादक, सटीक, टिकाऊ और लाभकारी बनाएंगी। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए डिजिटल कृषि, मजबूत कृषि विस्तार तंत्र, मूल्य श्रृंखला विकास तथा किसानों, वैज्ञानिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच बेहतर साझेदारी जरूरी है। कार्यक्रम में एनबीआरआई के निदेशक डॉ. एके. शासनी ने प्रो. केएन. कौल के कृषि, पादप विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण में योगदान को याद किया।