लखनऊ। जनेश्वर मिश्र पार्क में रेपर्टवा फेस्टिवल के अंतिम दिन रविवार को दर्शकों का उत्साह चरम पर रहा। सर्द शाम में जहां एक ओर मशहूर इंडियन रॉक बैंड ‘अग्नि’ के कलाकारों ने जहां तालियों की गर्माहट भर दी तो वहीं गायकी, स्टैंडअप कॉमेडी और किस्सागोई ने श्रोताओं को उत्साह, उमंग व ऊर्जा से भर दिया।
माहौल मंच से मशहूर इंडियन रॉक बैंड ‘अग्नि’ के गायकों ने जब अपनी प्रस्तुतियां दीं तो सर्द रात में भी श्रोताओं में जोश भर गया। कबीर के दोहों पर उनके मशहूर गानों पर लोग जमकर थिरके। इसके बाद बैंड ने आंखें मिलाएंगे डर से... सुनाकर लोगों की खूब तालियां बटोरीं। मनमानी... और आहटें... गानों पर देर रात तक लोग झूमते रहे।
मशहूर कॉमेडियन रवि गुप्ता रविवार को रेपर्टवा फेस्टिवल के मंच पर पहुंचे, उनके आने पर श्रोताओं ने तालियों से इस्तकबाल किया। रवि गुप्ता ने गुदगुदाने वाले चुटकुले सुनाए। उनकी टाइमिंग व पंच दर्शकों को खूब पसंद आए। इससे पूर्व प्रिया मलिक ने किस्सागोई की और कलाकार ज्योति गुप्ता, नम्रता, सचिन ने इश्क थीम पर कहानियां सुनाईं।
खोने के डर से होता है किसी की अहमियत का अहसास
किस्सागोई से मशहूर हुईं प्रिया मलिक ने रेपर्टवा फेस्ट में श्रोताओं को भावुक कर देने वाली कहानी सुनाई। किस्सों की शुरुआत उन्होंने अपने देहरादून के घर से की। उन्होंने बताया कि जब वह घर से दूर हुईं तो पता लगा कि घर कितना जरूरी है। अपने खास अंदाज में उन्होंने सुनाना शुरू किया। कहा, कभी मेरे घर की दहलीज पर जो तुम कदम रखोगे तो सीलन लगी कच्ची दीवारों को देखकर चौंकना नहीं। तुम्हारे जाने के बाद कोई इन्हें रंगने आया नहीं। मां से जुड़ा भावुक कर देने वाला एक वाकया भी सुनाया। उन्होंने बताया कि पहले मां मुझसे बहुत सारे सवाल पूछती थी और मैं जवाब देती थी। बड़ी हुई तो मेरे जवाब कम होते गए और मां के सवाल मुझे परेशान करने लगे। एक रात उनकी मां बीमार हुईं और आईसीयू में भर्ती हो गईं। पूरी रात आईसीयू के बाहर वह उनके सवालों का इंतजार करती रही। तब उन्हें पता चला कि किसी को खोने का डर ही उसकी अहमियत का अहसास करवाता है।
मेरी उड़ान देखेंगे सारे...
इंडी पॉप फेम गायक रमन नेगी ने गिटार पर ना हो मोहताज अपने माजी के... सुनाया तो वहां मौजूद युवा श्रोता उनके साथ गिटार की धुन पर थिरकने लगे। इसके बाद रमन ने आरजू ढूंढे यूं खुशी के ठिकाने... सुनाया। युवाओं के जोश के बीच रमन ने ओ मेरे दिलनशी है दस्तूर यही, मेरी उड़ान देखेंगे सारे... जैसे एक से बढ़कर एक गीत पेश किए। उनके गीतों की धुन पर श्रोता थिरकने से साथ उनके गानों के बोल भी गुनगुना रहे थे।
‘द एफ वर्ड’ में दिखा बात करने से सुलझती है मन की गुत्थी
आकर्ष खुराना निर्देशित नाटक ‘द एफ वर्ड’ में एक अव्यवस्थित परिवार व उसके सदस्यों के बीच की अनकही परेशानियों की कड़वी और मीठी कहानी को पेश किया गया। दिखाने की कोशिश की गई कि परिवार के बीच संवादहीनता किस तरह तमाम मुश्किलों को जन्म देती है।नाटक में हाईस्कूल के शिक्षक चेतन अरसे बाद अपने पिता को उनके पसंदीदा रेस्तरां में भोजन के लिए ले जाते हैं, ताकि उनके मन की परेशानियों को बेहतर तरीके से समझ सकें। बातचीत से बहुत सी बातें खुलती हैं, रिश्ते और मन की तमाम उलझी गुत्थियां सुलझती हैं। आकर्ष खुराना के इस मार्मिक नाटक को लोगों की खूब तालियां मिलीं। मंच पर आकर्ष खुराना समेत सिद्धार्थ, गरिमा और मलाइका ने शानदार अदाकारी की।