प्रधानमंत्री आवास योजना में अब सभी निर्माण एजेंसियों को कम आय वर्ग के लिए 35 फीसदी सस्ते आवास बनाना अनिवार्य कर दिया गया है।
अभी उत्तर प्रदेश में यह सीमा 20 फीसदी है। इसमें दस प्रतिशत एलआईजी और इतने ही ईडब्ल्यूएस मकान बनाना अनिवार्य है। यानी नए बदलाव के तहत कम आय वर्ग के लिए अब विकास प्राधिकरण और आवास विकास परिषद सहित निजी हाउसिंग कंपनियों को ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के ज्यादा मकान बनाने होंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना में एफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप में सरकारी और निजी एजेंसी के लिए यह प्रतिबंध है कि वह 35 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस मकान बनाएगी और योजना 250 आवासों से कम की नहीं होनी चाहिए।
इसके आधार पर ही केंद्र सरकार एफोर्डेबल योजना को मंजूरी देगी। प्रधानमंत्री आवास योजना में आवेदन करने वाले के लिए आय सीमा सालाना तीन लाख रुपये रखी गई है। इससे योजना में बड़ी तादाद में लोग मकान के लिए आवेदन कर रहे हैं।
इसको देखते हुए अब आवास विकास और विकास प्राधिकरण अपने-अपने स्तर पर योजना के प्रस्ताव बनाने शुरू कर दिए हैं। आवास विकास परिषद में इसको लेकर मुख्य अभियंता आरके अग्रवाल की ओर से सभी योजनाओं के प्रोजेक्ट मैनेजरों को निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं कि वे प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर हाउसिंग योजना के प्रोजेक्ट तैयार करें।