एलयू में बीए और बीए ऑनर्स की प्रवेश परीक्षा में ऊंची मेरिट (हाईस्कूल व इंटरमीडिएट) वाले भी फेल हो गए। हालत यह रही कि सीटें भरने के लिए विवि को उन स्टूडेंट्स तक को दाखिले के लिए बुलाना पड़ा, जिन्हें प्रवेश परीक्षा में माइनस अंक मिले थे।
मंगलवार को विवि में बीए और बीए ऑनर्स की रिक्त सीटों के लिए अंतिम चरण की काउंसलिंग हुई। इसमें प्रवेश परीक्षा में शामिल अंतिम रैंक तक के अभ्यर्थियों को दाखिला दिया गया। मेरिट सूची के अनुसार 3756 रैंक पर जिस अभ्यर्थी को दाखिला दिया गया उसे प्रवेश परीक्षा में माइनस 23 अंक मिले थे।
हालांकि, माइनस 44 अंक पाने वाले अभ्यर्थी तक को प्रवेश के लिए बुलाया गया था। पिछले वर्ष तक विवि में सभी दाखिले इंटरमीडिएट की मेरिट के आधार पर होते थे। उस समय यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि इतने अधिक अंक हासिल करने वाला अभ्यर्थी असल में कितने पानी में है।
मगर, प्रवेश परीक्षा ने ऐसे अभ्यर्थियों की पोल खोल दी है। इससे पहले विवि ने जब एलएलबी ऑनर्स में प्रवेशित स्टूडेंट्स की सूची जारी की थी तो भी यह पता चला कि एक तरफ इंटरमीडिएट में मात्र 52.33 फीसदी अंक पाने वालों को एलयू में दाखिला मिल गया, वहीं 90 फीसदी से अधिक अंक वाले हाथ मलते रह गए।
विवि में माइनस अंक पाने वाले स्टूडेंट्स को भी दाखिला मिलने पर सभी जगह चर्चाएं शुरू हो चुकी हैं। शिक्षक ही आपस में यह चर्चा करने को मजबूर हैं कि क्या ऐसे स्टूडेंट्स को भी विवि में प्रवेश दिया जाना चाहिए जो कि एंट्रेंस में शून्य से भी नीचे अंक हासिल करते हों।
इसके अलावा यह भी कहा जा रहा है कि प्रवेश में कुछ मानक या न्यूनतम कट ऑफ तो निर्धारित होना ही चाहिए कि उससे कम अंक हासिल करने वालों को प्रवेश न मिले, भले ही इसकी कीमत रिक्त सीटों के रूप में चुकानी पड़े।
कई अभ्यर्थियों को शाम तक करना पड़ा इंतजार
अपनी बारी का इंतजार करते स्टूडेंट्स
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पिछले वर्षों से तुलना करें तो इस बार बीए और बीए ऑनर्स में मिलाकर करीब 400 अधिक प्रवेश हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद विवि में करीब 179 सीटें रिक्त रह गई हैं। प्रवेश परीक्षा में बुरी तरह से फेल अभ्यर्थियों तक को अवसर मिलने के बाद भी यह सीटें नहीं भर पाईं।
विवि में बीए की 10 परसेंट सीटें बढ़ने के बद लगभग 1749 सीटें हैं। मंगलवार की काउंसलिंग के बाद फंक्शनल हिंदी में 9, हिंदी में 40, फ्रेंच में 21, फंक्शनल संस्कृत में 15, संस्कृत में 24, उर्दू में 77, अरब कल्चर में 66, अरेबिक में 64, एशियन कल्चर में 24, ज्योतिर्विज्ञान में 11, पर्शियन में 48, होम साइंस में 50, बीए ऑनर्स पब्लिक पॉलिसी में 16 और सोशल वर्क, पुलिस साइंस व रूरल डवलपमेंट के समूह में 30 सीटें अब भी रिक्त हैं।
मंगलवार को आयोजित बीए और बीए ऑनर्स की काउंसलिंग में मात्र 86 स्टूडेंट्स ने रिपोर्ट किया। इनमें से दाखिला सिर्फ 80 ने ही लिया। इसके बावजूद काउंसलिंग प्रक्रिया देर शाम सात बजे के बाद तक चलती रही।
केमेस्ट्री विभाग में बने सेंटर पर बिजली व्यवस्था गड़बड़ाने से प्रक्रिया में देरी हुई। सुबह से आए कई अभ्यर्थियों को शाम तक इंतजार करना पड़ा।
एलयू के प्रवेश समन्वयक प्रो. अनिल मिश्रा का कहना है कई वर्षों बाद प्रवेश परीक्षा हुई। 12 अप्रैल से 12 जुलाई के बीच स्नातक के सभी प्रवेश पूरे कर लिए गए, जो कि पिछले वर्ष से काफी पहले है। एक नया सिस्टम लागू किया गया, संभव है इसमें कुछ कमियां हों।
आने वाले समय में सिस्टम में इंप्रूवमेंट किया जा सकता। इस साल कटऑफ का नियम नहीं बनाया था, क्योंकि माइनस अंक की बात पर ध्यान नहीं गया। प्रवेश के बीच में प्रक्रिया बदलना उचित नहीं। अगले साल संभव है कि कट ऑफ का नियम भी लागू हो।