डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में पूर्व में हुए पीएचडी प्रवेश में गड़बड़ी सामने आने लगी है। लगातार हो रही डीआरसी व आरडीसी के गठन व बैठक में यह सामने आया है कि कई लोगों ने बिना प्रवेश परीक्षा के ही पीएचडी में प्रवेश ले लिया था। जब उनके रिकार्ड मांगे गए तो उनके इनरोलमेंट नंबर तक का रिकॉर्ड नहीं मिला है। इस पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।
विवि में पीएचडी का मामला काफी दिनों से विवादों में चल रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. निशीथ राय को हटाए जाने के मामले में एक आरोप यह भी था। वर्तमान कुलपति प्रो. राणा कृष्ण पाल सिंह ने कार्यभार संभालने के बाद पीएचडी को बढ़ावा देने और इसकी प्रक्रिया को पटरी पर लाने की बात कही थी।
इस दिशा में काम भी शुरू किया। पिछले दिनों जिन विभागों में डीआरसी नहीं थी, उसका गठन किया गया और बैठकें हुईं। इसी क्रम में आरडीसी की भी पहली बैठक हुई। लंबित मामले क्लियर हुए तो विवि के 12 साल के इतिहास में पहली पीएचडी भी पूरी हुई। लेकिन इसके साथ ही इसकी कमियां भी सामने आने लगी हैं।