केजीएमयू प्रशासन ने चौक कोतवाली में भी तहरीर दी। पुलिस ने जांच की बात कहकर रिपोर्ट नहीं दर्ज की। अब नए सिरे से केजीएमयू प्रशासन ने तहरीर दी है। इसमें जेई एसपी सिंह, सामान लगवाने वाले, तीन संविदा कर्मचारियों के नाम है। हालांकि, देर शाम तक रिपोर्ट नहीं दर्ज की थी।
ट्रक पकड़े जाने के बाद अमर उजाला ने इसे मुद्दा बनाया। आशंका जताई कि लाखों रुपयों का गोलमाल हुआ है। छह अक्तूबर को माई सिटी में ‘केजीएमयू में गुपचुप भेज रहे थे 30 लाख का माल’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर घोटाले का खुलासा किया था। आठ अक्तूबर को ‘केजीएमयू में दागियों पर अफसर मेहरबान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बताया गया कि किस तरह से पहले भी आरोपी इंजीनियर विभिन्न मामलों में संलिप्त रहे हैं।
इसके बावजूद अधिकारी मामले पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। 11 अक्तूबर को ‘केजीएमयू : पूरी लाइटें नहीं लगाई, फिर भी कर दिया लाखों का भुगतान’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर बताया गया कि किस तरह बिना लाइट लगाए ही भुगतान कर दिया गया है। साथ ही यह भी बताया गया कि लोहिया संस्थान, आईआईटी ऑफिस, जल निगम ऑफिस सहित सात जगह लाइट लगाई गई हैं। इस पर नेडा की टीम भी अलग से जांच कर रही है।