यह अधिनियम गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस व गांधी जयंती के दिवसों में अवकाश देने के लिए बनाया गया था। केंद्र के वेतन संहिता-2019, औद्योगिक श्रम संहिता-2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशाएं संहिता-2020 में राष्ट्रीय पर्वों के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में इस अधिनियम को समाप्त किया जाना औचित्यपूर्ण नहीं है।
यूपी औद्योगिक शांति (मजदूरी का यथासमय संदाय) अधिनियम-1978
इस अधिनियम में वृहद औद्योगिक प्रतिष्ठानों में श्रमिकों को समय पर वेतन अदायगी सुनिश्चित करने के लिए विशेष आपात उपबंध हैं। श्रम विभाग ने कहा है कि समय से वेतन भुगतान न होने पर गंभीर औद्योगिक अशांति उत्पन्न होने की आशंका रहती है। नई श्रम संहिताओं में समय से इस संबंध में आपात उपबंध नहीं बनाए गए हैं। श्रम संहिताओं के लागू होने बाद भी इस अधिनियम की आवश्यकता बनी रहेगी।
यह अधिनियम संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ऐसी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए बनाया गया है, जो कर्मचारी राज्य बीमा योजना तथा भविष्य निधि योजना के अंतर्गत अनुमन्य नहीं हैं। इसी अधिनियम के तहत यूपी श्रम कल्याण निधि का गठन किया गया है।
इस निधि में श्रमिकों के वेतन का कुछ अंश जमा किया जाता है और उसी के ब्याज से संचालित होती है। राज्य सरकार या सेवायोजक कोई अंशदान नहीं करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 में भवन निर्माण के कर्मकारों, असंगठित क्षेत्र के कर्मकारों तथा संगठित क्षेत्र के कर्मकारों को कर्मचारी भविष्य निधि एवं कर्मचारी राज्य बीमा योजना का लाभ देने की व्यवस्था है। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का प्रावधान इस संहिता में नहीं है। ऐसे में इस अधिनियम को भी बनाए रखा जाना चाहिए।