परिवहन निगम की बस को बेवजह ढाबे पर खड़ी करने वाले ड्राइवरों-कंडक्टरों को अब नौकरी तक से हाथ भी धोना पड़ सकता है। यानी संविदा ड्राइवर-कंडक्टर होने पर सीधे बर्खास्तगी और नियमित होने पर निलंबन होगा।
यह सब निगम के इंटेलीजेंस ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) से संभव हो सकेगा। आईटीएमएस की ट्रायल टेस्टिंग में लखनऊ और गाजियाबाद के ड्राइवर-कंडक्टर फंस चुके हैं।
निगम के प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम के अनुसार यात्रियों की सुविधा और ड्राइवर-कंडक्टर की मनमानी रोकने के लिए बसों को जीपीएस (ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम) से लैस करने का सिलसिला जारी है।
जीपीएस एवं जीपीआरएस (जनरल पैकेट रेडियो स्विचिंग) की व्यवस्था प्रभावी होने के कारण अब क्षेत्रीय प्रबंधक एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे।
ड्राइवर-कंडक्टर मनमाने तरीके से बस को बेवजह बिना निर्धारित स्थान के रोकेंगे तो उसका विवरण उनके पास पहुंच जाएगा। इससे उन पर दोतरफा निगरानी होगी।
निगम के 1200 ड्राइवर-कंडक्टर प्रबंधन के राडार पर हैं। इनकी बसों में आईटीएमएस की डिवाइस लग चुकी है। इसके माध्यम से जीपीएस की जानकारी मिलने लगी है।
ट्रायल टेस्टिंग में लखनऊ और गाजियाबाद क्षेत्र की अनगिनत बसों के ड्राइवर-कंडक्टर फंस चुके हैं। इन परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधकों द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है। लेकिन लखनऊ के क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव चौहान के निलंबित होने के कारण यह जांच प्रभावित हो गई है।
प्रबंध निदेशक ने बताया कि ट्रायल टेस्टिंग में गाजियाबाद एवं लखनऊ की तमाम बसों को निर्धारित स्टाप न होने के बाद भी 50 से 55 मिनट तक खड़ी करके लेट किया गया है।
अधिकतर बसें ढाबे पर खड़ी रही हैं। इस नाते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, जो ड्राइवर-कंडक्टर नहीं सुधरेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
प्रबंध निदेशक ने निर्धारित स्टाप के अतिरिक्त बस खड़ी करने के लिए क्षेत्रीय प्रबंधकों एवं सहायक क्षेत्रीय प्रबंधकों को सरकुलर भेज कर तीन तरह से कार्रवाई करने का आदेश दिया है।
पहले चरण में ड्राइवर-कंडक्टर की लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार जुर्माना वसूल कर छोड़ दिया जाएगा। जो ड्राइवर-कंडक्टर इस गलती को दूसरी बार दोहराएंगे तो फिर जुर्माना देकर बच सकेंगे लेकिन तीसरी बार पकड़े जाने पर सीधे प्रशासनिक कार्रवाई होगी।