अपनी टीम के साथ डॉ जेडी रावत और बच्चे को गोद में लिए मां
- फोटो : अमर उजाला
केजीएमयू के डॉक्टरों ने आमाशय से आहार नाल बनाकर एक बच्चे को नई जिंदगी दी है। जन्म के वक्त ही बच्चे का आहार नाल सिर्फ गले तक ही था, ऐसे दूध पीने से उल्टी हो जाती थी। पीडियाट्रिक सर्जन प्रो. जेडी रावत की टीम ने दो साल में तीन ऑपरेशन के बाद बच्चे की आहार नाल तैयार करके हुए इस योग्य बना दिया गया है कि अब वह खाने पीने लगा है।
उसे शुक्रवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सिद्धार्थनगर निवासी मेराज अहमद की पत्नी निशा को 21 मार्च 2017 को बच्चे को जन्म दिया। बच्चे ने दूध नहीं पिया। जबरन दो घूंट दूध डाला गया तो उल्टी हो गई। शक के आधार पर चिकित्सक ने केजीएमयू भेज दिया।
यहां करीब दो साल के इलाज के बाद बच्चा स्वस्थ हो गया है। अब बच्चे को करीब पांच साल तक हर छह माह में एक बार जांच के लिए बुलाया जाएगा। फिर वह सामान्य बच्चों की तरह विकास करने लगेगा। करीब 10 हजार में एक बच्चे को यह बीमारी होती है।
निजी अस्पताल में आता चार से पांच लाख रुपये खर्च
डॉ जेडी रावत और बच्चे को गोद में लिए मां
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इस बीमारी को इसोफेगोस्टॉमी एड्रोसिया कहते हैं। इस तीनों ऑपरेशन में परिवारीजनों को करीब 50 हजार रुपया खर्च करना पड़ा। निजी अस्पताल में इलाज कराने पर चार से पांच लाख रुपये तक खर्च आता है।
दो साल में हुए तीन ऑपरेशन
पहली सर्जरी : केजीएमयू में 22 मार्च को प्रो. जेडी रावत ने जांच की तो बच्चे की आहार नाल सिर्फ गले तक थी। उसे तत्काल भर्ती करके पहला ऑपरेशन किया गया। गले के पास ऑपरेशन करके अविकसित आहार नाल को ट्यूब के जरिये (इसोफेगोस्टॉमी) बाहर निकाल दिया गया, ताकि लार बाहर निकलती रहे और फेफड़े में संक्रमण न हो पाए। इसके बाद आमाशय में एक नली (गैस्ट्रास्टॉमी) डालकर उसे बाहर निकाल दिया गया। इस नली से बच्चे की मां दूध पिलाती रही।
दूसरी सर्जरी : तीन अप्रैल 2019 को बच्चे को भर्ती करके उसके आमाशय के पिछले हिस्से को लेकर एक ट्यूब बनाई गई। इस ट्यूब को गर्दन तक लाया गया। इसे इस तरह स्टेपल किया गया था कि आमाशय अपनी जगह काम करता रहे और बगल में नई नलिका विकसित हो जाए।
तीसरी सर्जरी : एक मई को तीसरा ऑपरेशन किया गया। इसमें आमाशय से विकसित की गई नलिका को गले के पास बाहर निकली गई नलिका से जोड़ा गया। अब यह बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। सभी चीजें खा रहा है।
कमजोर था बच्चा, डेढ़ साल करना पड़ा इंतजार
अपनी टीम के साथ डॉ जेडी रावत
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प्रो. जेडी रावत ने बताया कि आहार नाल को विकसित करने का काम कई सालों से चल रहा है। इस ऑपरेशन में खास बात यह है कि बच्चा काफी कमजोर था। इस वजह से डेढ़ साल तक इंतजार किया गया। आमाशय को खींच कर बढ़ाने के बजाय उसके पिछले हिस्से के किनारे स्टेपल करके नई नलिका विकसित की गई। फिर उसे जोड़ा गया।
इस टीम ने की सर्जरी : बच्चे को जीवनदान देने वाली टीम में प्रो. जेडी रावत के साथ डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. विपुल, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अनिता मलिक, डॉ. प्रेमराज, डॉ. सुरेश वर्मा एवं नर्सिंग स्टाफ में वंदना, अंजु, पुष्पा शामिल रहीं।