एक तरफ आजम खां ने चुनाव आयोग से माफी नहीं मांगने का ऐलान कर दिया है वहीं, दूसरी ओर आजम के प्रशंसकों ने आयोग को ही घेरे में ले लिया है।
अपना विरोध जताने के लिए वक्फ बोर्ड के चेयरमैन शहर विधायक आबिद रजा के नेतृत्व में बड़ी तादाद में लोगों ने छह सड़का पर भूख हड़ताल की।
विधायक ने कहा कि कैबिनेट मंत्री आजम खां पर चुनाव आयोग ने इकतरफा कार्रवाई की है।
आयोग का यह कदम गैरपरंपरागत, असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है, इसे समाजवादी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
बाद में सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र यादव को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन देकर भूख हड़ताल खत्म की।
चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के अंदर चुनाव आयोग ने आजम खां पर लगाई पाबंदी नहीं हटाई तो आमरण अनशन के साथ आंदोलन शुरू किया जाएगा।
आयोग भाजपा के इशारे पर कर रहा काम
छह सड़का स्थित भूख हड़ताल स्थल पर हुई सभा में आबिद रजा ने कहा कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के इशारे पर काम कर रहा है।
भारत के मुसलमानों और सेकुलर हिंदुओं से उनका मौलिक अधिकार छीनने का प्रयास कर रहा है।
आयोग ने भाजपा नेता अमित शाह और सपा नेता आजम खां पर एक साथ पाबंदी लगाई थी, लेकिन भाजपा नेता से पाबंदी हटा ली गई।
वहीं, ज्ञापन में उन्होंने महामहिम से हस्तक्षेप की मांग कर कहा है कि आजम खां पर लगी रोक हटवाने के लिए वह निर्देशित करें।
नाराज सपाई का आत्मदाह का प्रयास
आचार संहिता उल्लंघन के मामले में नगर विकास मंत्री आजम खां पर लगाई गई पाबंदी से सपाइयों में नाराजगी है।
सोमवार को एसडीएम कार्यालय में एक सपा कार्यकर्ता दासिम पठान पेट्रोल से भरी बोतल लेकर पहुंच गया और आत्मदाह का प्रयास किया।
जिससे वहां पर अफरातफरी मच गई। पुलिस ने युवक को गिरफ्तार शांतिभंग में चालान कर दिया।
इसके अलावा जिले में कई जगहों पर सपा कार्यकर्ताओं ने धरना प्रदर्शन कर पाबंदी हटाए जाने की मांग की।
सपा में आक्रोश व्याप्त है
चुनावी जनसभा में विवादित टिप्पणी करने पर चुनाव आयोग ने कैबिनेट मंत्री आजम खां पर सभाएं, रैली और भाषणबाजी करने पर पाबंदी लगा दी थी।
जिसको लेकर सपा में आक्रोश की स्थिति है। जिलेभर में धरना प्रदर्शन हो रहे है।
उधर, आजम खां पर लगी चुनाव आयोग की पाबंदी के विरोध में महिलाएं फिर सड़कों पर उतर आईं। कुछ देर प्रदर्शन कर वहीं धरने पर बैठ गईं। बाद में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा गया।
बताते चलें कि आजम खां ने कारगिल युद्ध की जीत पर कहा था इसमें मुस्लिम सैनिकों की वजह से मदद मिली थी न कि हिंदू सैनिकों की वजह से।