आचार्य किशोरीदास वाजपेयी साहित्यकार के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी थे। कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में 31 दिसंबर 1929 को जवाहर लाल नेहरू ने पूर्ण स्वराज्य की मांग उठाई और देश का झंडा फहराया। साथ ही कांग्रेस ने प्रस्ताव पारित किया कि 26 जनवरी 1930 को पहला 'स्वतंत्रता दिवस' मनाया जाए। तब से आजादी मिलने तक कांग्रेस हर वर्ष 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाती रही। अब यह गणतंत्र दिवस है।
एक वर्ष बाद सन 1931 का स्वतंत्रता दिवस आने वाला था। डॉ. योगेंद्र नाथ शर्मा 'अरुण' के संस्मरण से पता चलता है, कांग्रेस की तैयारी उस दिन सभी जगह स्वतंत्रता दिवस मनाते हुए वहीं प्रतिज्ञा दोहराने की थी, पर अंग्रेजों ने जगह-जगह छापे डलवाकर प्रतिज्ञा की प्रतियां जब्त करा ली।
कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई को भी प्रतियों की जरूरत थी। आगरा में 'सैनिक' अखबार निकालने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. कृष्णदत्त पालीवाल ने अंग्रेजों से छिपाकर अपने प्रेस में रातों रात इस प्रतिज्ञा की 500 प्रतियां छापी, पर अब समस्या इन प्रतियों को लखनऊ पहुंचाने की थी।