चार बार अंडर 16 में खेल चुके गौरव चोट लगने के कारण अब भले ही मैदान पर अपना करिश्मा न दिखा पाते हो, लेकिन मैदान के बाहर रहकर उभरते खिलाड़ियों की मदद करने में जुटे हैं। इतना ही नहीं कला छात्रों को मंच प्रदान करने की जद्दोजहद में भी वह लगे रहते हैं।
भारतीय युवा इस समय जहां क्रिकेट के दीवाने हैं, वहीं गौरव अवस्थी के लिए राष्ट्रीय खेल हॉकी ही सब कुछ है। चार बार उत्तर प्रदेश की अंडर-16 टीम से खेल चुके गौरव अवस्थी इस खेल को फिर से पुराने दिन लौटाना चाहते हैं। चोट के कारण खेल से बाहर हो चुके गौरव अब प्रतिभावान हॉकी खिलाड़ियों को जरूरी सामान मुहैया कराते हैं।
खेल के साथ ही राष्ट्रीय कला मंच के साथ मिलकर ललित कला के विद्यार्थियों को मंच प्रदान करने का काम भी वह कर रहे हैं। गौरव ने सात साल की उम्र में ही हॉकी की स्टिक थाम ली थी। हॉकी के प्रति समर्पण ने उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के स्टाइपेंड पर रहने का मौका दिया।
अपनी प्रतिभा के दम पर गौरव ने 50 से ज्यादा प्रदेशस्तरीय टूर्नामेंट खेले। चार बार अंडर-16 की टीम में चुने गये। इसमें एक बार स्वर्ण पदक के हकदार भी बने। दो बार जूनियर स्टेट टूर्नामेंट में प्रतिभाग किया। हॉकी को पुराना गौरव मिल सके इसलिए अपने जेब खर्च और दोस्तों से पैसा जमा करके जरूरतमंद खिलाड़ियों को जरूरी किट आदि दिलाते हैं।