फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

45 हजार वसूले, डॉक्टर भागा, तड़प-तड़प कर मर गया मरीज

Tue, 21 Jul 2015 02:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
पित्त ग्रंथि यानी गाल ब्लैडर में स्टोन था। मरीज शिवम शुक्ला (21) राम मनोहर लोहिया अस्पताल आया। डॉक्टर ने जांचें कराई। अस्पताल में लेजर सर्जरी की सुविधा नहीं होने की बात कह 45 हजार रुपये वसूले। सोमवार को निजी अस्पताल में ले जाकर उसकी लेजर सर्जरी कर दी। ऑपरेशन के बाद खून बहना नहीं रुका।
विज्ञापन


शिवम की हालत बिगड़ गई तो लोहिया अस्पताल में ले आकर भर्ती कर दिया। वेंटिलेटर पर कुछ घंटे इलाज चला और शिवम ने दम तोड़ दिया। शिवम आईएएस की तैयारी कर रहा था।

परिवार के उससे बड़े सपने थे। पर डॉक्टर के लालच और लापरवाही ने उसकी जान ले ली। शिवम की मौत होते ही अस्पताल स्टाफ ने उसका पूरा रिकॉर्ड छीन लिया। इस पर परिवारीजनों का गुस्सा और फूट पड़ा। बेटे की मौत के लिए डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराते हुए उन्होंने हंगामा किया।
विज्ञापन


डॉक्टर बोला-8 एमएम का स्टोन है, बिना किसी रिस्क के हो जाएगा ऑपरेशन
फतेहपुर जिले के कलेक्टरगंज का रहने वाले ज्ञानदेव शुक्ला का बेटा शिवम तीन महीने पहले इलाज के लिए लोहिया अस्पताल पहुंचा था। ज्ञानदेव के मुताबिक अस्पताल के सर्जन डॉ. एके श्रीवास्तव ने जांचें करवाई। इसके बाद बताया कि आठ एमएम का गाल ब्लैडर में स्टोन है। अस्पताल में लेजर से स्टोन के ऑपरेशन की सुविधा नहीं है।

थोड़ा खर्च आएगा लेकिन बिना किसी रिस्क और परेशानी के ऑपरेशन हो जाएगा। शिवम को सोमवार को अस्पताल बुलाया गया। सोमवार सुबह दस बजे अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टर ने कहा कि ऑपरेशन दो बजे के बाद होगा। दो बजते ही डॉक्टर शिवम को लेकर कमता सुरेंद्रनगर स्थित सर्जिकल क्लीनिक पहुंच गया।

कहा-ब्लीडिंग हो रही है, थोड़ा वक्त लगेगा

ज्ञानदेव ने बताया कि दोपहर करीब ढ़ाई बजे ऑपरेशन शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चलता रहा। ओटी से डॉ. एके श्रीवास्तव बाहर निकले और बोले की लगातार ब्लीडिंग हो रही है थोड़ा टाइम लगेगा। शिवम के ऑपरेशन से पहले दो यूनिट ब्लड लोहिया अस्पताल से मंगवाया गया था।

ऑपरेशन के बाद रक्तस्त्राव कम न हुआ तो दो यूनिट ब्लड और मंगवाया गया। सर्जन डॉ. एके श्रीवास्तव ने अपनी कारगुजारी को छिपाने के लिए आनन-फानन में शाम छह बजे उसे एंबुलेंस पर लदवाया और लोहिया अस्पताल के वेंटिलेटर यूनिट में पहुंचा दिया।  बिना ऑक्सीजन के एंबुलेंस से वेंटिलेटर लाकर बेड एक पर भर्ती कराने के बाद डॉ. श्रीवास्तव वहां से फरार हो गए।

खून से लाल हो गईं चादरें, कोई डॉक्टर नहीं देखने आया
शिवम को इस कदर ब्लीडिंग हो रही थी कि एंबुलेंस की बेड शीट लाल हो गई। यही नहीं वेंटिलेटर यूनिट का बेड भी खून से सन गया। ब्लीडिंग नहीं थमा और शाम करीब सात बजे शिवम ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। इस दौरान कोई डॉक्टर उसे नहीं देखने आया।

टूटे सपने, बिखर गया परिवार, चीखों से गूंजी इमरजेंसी
परिवारीजन बेसुध हो गए और पूरा यूनिट उनकी चीख-पुकार से गूंज उठा। रोते-बिलखते परिवारीजन रात दस बजे तक शव के साथ इमरजेंसी में जमे रहे। उन्होंने लापरवाही की जांच के लिए शव का पोस्टमार्टम कराने तक की बात कही। देर रात करीब साढ़े दस बजे हंगामा और बवाल शांत हुआ और पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए मॉर्च्युरी में रखवाया।
विज्ञापन

डॉक्टर के सा‌थ ही प्रशासनिक अधिकारी भी फंसे

सूबे के भूतत्व एवं खनिकर्म मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति रात करीब आठ बजे लोहिया संस्थान में भर्ती एक मरीज को देखने लोहिया संस्थान पहुंचे थे। लोहिया अस्पताल में भीड़ व हंगामा होते देख वहां पहुंचे तो शिवम के भाई सत्यम ने उनको डॉ. एके श्रीवास्तव के पूरे कारनामे की जानकारी दी।

इसके बाद उन्होंने गोमतीनगर एसओ को मामले में डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया। उन्होंने परिजनों को आश्वासन दिया कि मामले की जांच कराकर लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर और अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ भी जांच कराई जाएगी। जिससे ये पता चल सके कि सरकारी अस्पताल का डॉक्टर प्राइवेट अस्पताल में मरीजों को लेकर कैसे ऑपरेशन कर रहा है।

अस्पताल के सर्जन डॉ. एके श्रीवास्तव ने मरीज को सर्जिकल मामले पर डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरसी अग्रवाल कहते हैं कि क्लीनिक में लेकर लेजर ऑपरेशन किया।

मरीज की हालत बिगड़ने पर अस्पताल की वेंटिलेटर यूनिट में भर्ती कराया गया। लेकिन मरीज की मौत हो गई। इसके बाद से डॉ. एके श्रीवास्तव का फोन स्विचऑफ है। मामले की जांच कराई जाएगी और कार्रवाई होगी। अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों का प्राइवेट में इलाज या ऑपरेशन करना नियम के खिलाफ है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें