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Lucknow News: भारत में छपे पाकिस्तानी नोट ने सुनाई बंटवारे के बाद की कहानी

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एक्सपो में लाया गया पाकिस्तान का नोट। -संवाद
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लखनऊ। पाकिस्तान के पास अपनी मुद्रा छापने की व्यवस्था नहीं थी और भारत उसके लिए नोट छाप रहा था...। इतिहास का यह अनोखा अध्याय निराला नगर स्थित होटल में लगी सिक्कों की प्रदर्शनी में देखने को मिल रहा है। यहां प्रदर्शित पांच रुपये का एक दुर्लभ पाकिस्तानी नोट लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। अवध न्यूमिज्मैटिक सोसाइटी की ओर से आयोजित तीन दिवसीय अवध कॉइन एक्सपो में इस नोट को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
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एक्सपो के दूसरे दिन शनिवार को सोसाइटी के जॉइंट सेक्रेटरी गोकुलेश रस्तोगी ने बताया कि भारत से विभाजन के बाद पाकिस्तान के पास अपनी करेंसी छापने के लिए न तो केंद्रीय बैंक था और न ही सरकारी प्रेस। ऐसे में अंतरिम व्यवस्था के तहत भारतीय रिजर्व बैंक ने 1948 तक पाकिस्तान के लिए नोट मुद्रित किए। प्रदर्शित पांच रुपये के नोट पर आरबीआई के पहले गवर्नर सीडी देशमुख के हस्ताक्षर हैं। नोट के ऊपर अंग्रेजी में ‘गवर्नमेंट ऑफ पाकिस्तान’ और नीचे उर्दू में ‘हुकूमत ए पाकिस्तान’ लिखा है, जबकि बीच में ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ दर्ज है। इसके अलावा ब्रिटेन के राजा किंग जॉर्ज षष्ठम की तस्वीर भी है। गोकुलेश के अनुसार, भारत में मुद्रित नोट पाकिस्तान में बहुत कम समय तक प्रचलन में रहे। यही वजह है कि यह नोट अत्यंत दुर्लभ माना जाता है।

बर्मा में चलता था भारत में छपा नोट

प्रदर्शनी में एक और दुर्लभ पांच रुपये का नोट इतिहास के दूसरे अध्याय से रूबरू करा रहा है। श्री कॉइन्स के स्टॉल पर प्रदर्शित यह नोट भारत में मुद्रित हुआ था लेकिन इसका चलन बर्मा (अब म्यांमार) में था। गोकुलेश ने बताया कि 1937 में बर्मा के ब्रिटिश भारत से अलग होने के बाद वहां नई मुद्रा व्यवस्था पूरी तरह लागू होने तक भारतीय रिजर्व बैंक ने बर्मा में प्रचलन के लिए नोटों का मुद्रण किया था। इन नोटों पर भी आरबीआई के गवर्नर सीडी देशमुख के हस्ताक्षर हैं और ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ लिखा है।
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रुई पर रखे जाते हैं सिक्के

प्रदर्शनी में प्रयागराज से आए एक दंपती मिट्टी के सिक्के लेकर पहुंचे हैं। उनका दावा है कि ये सिक्के करीब 4000 साल पुराने हैं। बाहरी प्रभाव से सुरक्षा के लिए इन सिक्कों को रूई पर रखा जाता है। दंपती के अनुसार, ये सिक्के केवल प्रदर्शन के लिए हैं और इन्हें बेचा नहीं जा रहा है।

पैतृक विरासत है हुक्का

गोंडा से आए पुंडरीक कुमार के पास बेहद खास और एंटीक डिजाइन का हुक्का है। पुंडरीक का दावा है कि ये करीब 300-400 साल पुराना है। यह हुक्का उनकी पैतृक संपत्ति है, जिसे प्रदर्शित करने के उद्देश्य से प्रदर्शनी में लाए हैं।
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