जनता एक्सप्रेस की बोगियों के बीच दबने से टूटी हड्डियों ने जो जख्म दिया है, वह जल्द भरने वाला नहीं है। कई जगह से टूटी हड्डियां रह-रहकर भयंकर दर्द दे रही हैं। खेतीबाड़ी और मजदूरी कर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। अब कमर ही टूट गई तो चिंता सताने लगी है कि घर का खर्च कैसे चलेगा।
रायबरेली के रहने वाले 50 वर्षीय अब्दुल हमीद शुक्रवार को मुरादाबाद से अपने घर जा रहे थे। अब्दुल बताते हैं, निगोहां आने पर घर फोन कर बताया कि एक घंटे में पहुंच जाएंगे। गाड़ी जब बछरावां पहुंचने वाली थी तो चाय पीने का मन बनाया, लेकिन पलक झपकते ही गाड़ी स्टेशन पार कर गई। इस बीच तेज धमाका हुआ। कुछ पता ही नहीं चला। जब आंख खुली तो खुद को ट्रॉमा सेंटर में पाया।
बेड से उठने की कोशिश की तो शरीर ने साथ नहीं दिया। भाई मो. हनीफ ने बताया कि आराम करो, रीढ़ की हड्डी में चोट है। जांच में पता चला कि बैक बोन फ्रैक्चर हो गया है।
शनिवार को डॉक्टरों ने तीन घंटे की सर्जरी की। उनका कहना है कि इलाज लंबा चलेगा। ऐसे में अब्दुल को अब चिंता सताने लगी है कि जब खुद ही नहीं चल पाएंगे तो घर का खर्च कैसे चलेगा। चार-चार बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का क्या होगा।