इसके बाद परिजनों ने मकान मालिक सफदर अली से संपर्क कर गजेंद्र से बात कराने को कहा। सफदर ने अपने भतीजे को गजेंद्र के पास भेजा। उसने दरवाजा खटखटाया लेकिन भीतर से कोई प्रतिक्रिया नहीं सुनाई दी। इस बीच सफदर अली व आसपास के लोग मौके पर आ गए।
गजेंद्र को पुकारने पर उसकी दोनों बेटियां आईं तो उनसे दरवाजा खोलने को कहा गया। हालांकि, वह दरवाजा नहीं खोल पा रही थीं। माता-पिता को बुलाने के लिए कहने पर बच्चियां कमरे में गईं तो नजारा देखकर रोने-चीखने लगीं।
सूचना पाकर आई पुलिस ने किसी तरह बच्चियों से दरवाजे की कुंडी खुलवाई और भीतर प्रवेश किया। कमरे में पलंग पर रूबी का शव पड़ा था जबकि पंखे से बने फंदे से गजेंद्र लटका हुआ था। रूबी के गले में दुपट्टा कसा था। इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा ने बताया कि गजेंद्र और रूबी के बीच झगड़ा हुआ था जिसके बाद उसने रूबी की गला कसकर हत्या कर दी और खुद फंदे से लटक गया।
बालागंज चौकी तक पहुंचा था मामला पर पुलिस ने टरका दिया
गजेंद्र और रूबी के बीच हुआ झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों बालागंज पुलिस चौकी पहुंच गए। पुलिस सूत्रों ने बताया कि वहां मौजूद एक पुलिसकर्मी ने दोनों की बात सुनी। इसके बाद घरेलू मामला बताते हुए रूबी को डांटकर भगा दिया। कुछ देर के बाद गजेंद्र को भी समझाकर घर भेज दिया। घर पहुंचते ही गजेंद्र और रूबी के बीच फिर से कहासुनी व मारपीट शुरू हो गई। गुस्साए गजेंद्र ने आगरा में अपने परिजनों को फोन कर खुदकुशी करने की बात कही और पत्नी का गला कसने के बाद खुद आत्महत्या कर ली।