लखनऊ। सुरों की मिठास और श्रद्धा की गरिमा से सजी सोमवार की शाम भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में यादगार बन गई। महान गजल गायिका बेगम अख्तर की स्मृति में स्थापित ‘बेगम अख्तर चेयर’ के अंतर्गत आयोजित प्रथम सांस्कृतिक संध्या में भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा के स्वरों ने अवध की फिजा को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र अनूप जलोटा ने मंच संभालते ही माहौल को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया। ‘ऐसी लागी लगन’ से शुरू हुआ सुरों का सफर ‘अच्युतम केशवं’, ‘राम आएंगे’ और ‘इतनी शक्ति हमें देना दाता’ जैसे कालजयी भजनों तक पहुंचा तो पूरा कला मंडपम सभागार तालियों और आस्था की गूंज से भर उठा। खास क्षण तब आया, जब उन्होंने विद्यार्थियों के साथ सामूहिक जुगलबंदी की। गुरु और शिष्य के इस सुरमयी संवाद ने युवा कलाकारों को मंचीय बारीकियों की जीवंत सीख दे दी।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सीमा भारद्वाज ने किया। संगीत प्रेमियों के साथ-साथ शोधार्थियों के लिए भी यह संध्या भारतीय सुगम संगीत की सूक्ष्मताओं को समझने का सजीव अवसर बनी। हर प्रस्तुति पर श्रोता झूमते नजर आए।
कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि बेगम अख्तर चेयर के माध्यम से विश्वविद्यालय का लक्ष्य महान विभूतियों की कला-साधना को भावी पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम में कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन, गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, तालवाद्य विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार मिश्र, सहायक आचार्य (नृत्य) डॉ. रुचि खरे सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।
नृत्य, चिकित्सा और शोध का संगम
संगीत के सुरों के बीच ज्ञान की भी गूंज सुनाई दी। नृत्य विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुचि खरे के शोध पर आधारित पुस्तक “एक्यूप्रेशर और कथक नृत्य” का विमोचन हुआ। इसी अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने घोषणा की कि आगामी सत्र से फाइब्रोमायाल्जिया रोगियों के लिए नृत्य एवं मूवमेंट थेरेपी में एक सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किया जाएगा।
कोर्स की मुख्य विशेषताएं
डॉ. रुचि खरे के शोध ‘थेरेप्यूटिक मैजिक ऑफ कथक’ के आधार पर तैयार इस कोर्स में बॉडी-माइंड कोआर्डिनेशन, मूवमेंट अवेयरनेस और विशिष्ट नृत्य अभ्यास शामिल होंगे। शोध के अनुसार, दवाओं के साथ कथक आधारित थेरेपी लेने वाले मरीजों में रिकवरी की रफ्तार दोगुनी देखी गई है। यह एक वर्षीय कोर्स सत्र 2026-27 से प्रभावी होगा। कोर्स पूरा करने के बाद छात्र अस्पतालों में ‘डांस थेरेपिस्ट’ के रूप में करियर बना सकेंगे। आवेदन के पात्रों में बैचलर ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स (बीपीए) के छात्र, नृत्य साधक और स्वास्थ्य व पुनर्वास के क्षेत्र में काम करने के इच्छुक अभ्यर्थी शामिल हैं। अधिक जानकारी विवि की वेबसाइट www.bhatkhandemusic.edu.in पर उपलब्ध है।
सुरों की मिठास और श्रद्धा की गरिमा से सजी सोमवार की शाम भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में यादग
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