मुजफ्फरनगर-शामली में भाईचारा कायम कर बेघर लोगों को बसाने के लिए गठित मंत्रियों की कमेटी के एक्शन प्लान पर सोमवार को सहमति हो गई।
सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और नगर विकास मंत्री आजम खां ने इस पर मुहर लगा दी। तय हुआ कि मंत्री कैंपों और गांवों में जाएंगे। यही नहीं अफसरों के रवैये में सुधार के लिए उनके पेंच और कसे जाएंगे।
शिवपाल यादव की अध्यक्षता में उनके निवास पर सोमवार शाम चार बजे हुई मंत्रियों की दस सदस्यीय कमेटी की बैठक में मंत्रियों ने दंगा प्रभावित इलाकों में कैम्पों में रह रहे लोगों की वापसी के लिए गंभीरता से प्रयास करने का फैसला किया।
घंटों हुई माथापच्ची
इसके लिए तय हुआ कि कैम्पों और गांवों में जाकर जिम्मेदार लोगों से बातचीत कर हल निकालने की कोशिश की जाएगी। मंत्री कब और कहां जाएंगे ? यह तय करने की जिम्मेदारी शिवपाल को सौंपी गई है।
मंत्रियों के दौरे तीन अक्तूबर के बाद तय होंगे। दो अक्तूबर को सभी जिलों में सद्भावना एकता सभाएं की जाएंगी। कमेटी में शामिल सभी मंत्री शिवपाल सिंह के आवास से सीधे विक्रमादित्य मार्ग पर मुलायम सिंह के निवास पर चले गए। वहां
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सपा मुखिया के अलावा मुख्यमंत्री अखिलेश और आजम खां भी मौजूद थे। मुलायम ने कहा कि सभी लोग मिलजुलकर ऐसा रास्ता निकालें जिससे कैम्पों से लोगों की वापसी हो सके, उनके नुकसान की भरपाई और शांति कायम हो सके।
अफसरों पर साधा निशानाआजम खां ने कहा कि एफआईआर सभी लोगों की दर्ज होनी चाहिए। यदि गलत एफआईआर कराई जाती हैं तो फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाए। दोषियों को बख्शा न जाए और बेगुनाह लोगों को परेशान न किया जाए।
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उन्होंने अफसरों के रवैये में सुधार की बात उठाई। कहा कि कुछ अफसर मनमानी कर रहे हैं। ऐसे अधिकारियों पर लगाम लगाने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन में जहां खामियां हैं, उन्हें दुरुस्त किया जाएगा। सभी ने मंत्रियों द्वारा बनाई गई योजना पर सहमति जताते हुए इसे अमल में लाने के निर्देश दिए।
पाबंदी के बावजूद मेरठ में कैसे जुटी भीड़ मुजफ्फरनगर-शामली के दंगा प्रभावितों को फिर से गांवों में भेजने के मुद्दे पर बुलाई गई बैठक में काफी देकर तक मेरठ के सरधना क्षेत्र के खेड़ा गांव की पंचायत का मुद्दा छाया रहा।
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मंत्रियों ने सवाल उठाया कि रोक के बावजूद पंचायत के लिए क्यों हजारों लोगों की भीड़ जुटी। कहा गया कि पुलिस का पर्याप्त बंदोबस्त था, महिला पुलिस भी काफी संख्या में थी। फिर भी हजारों की भीड़ स्कूल के मैदान में कैसे पहुंच गई। पंचायत स्थल से पहले लोग क्यों नहीं रोके गए?
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आजम क्यों हो गए अलग-थ्ालग
मीटिंग के दौरान मुलायम सिंह ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद जब भाजपा व अन्य दल आजम खां की घेराबंदी कर रहे थे।
तब सरकार के मुस्लिम मंत्री चुप क्यों रहे। उन्होंने कहा, सरकार की एकजुटता का संदेश देना जरूरी होता है।