लखनऊ में अब तक 1102 लोग कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। इनमें से 95 प्रतिशत से ज्यादा शहरी इलाके के हैं। मरीजों में ग्रामीण इलाकों के सिर्फ पांच फीसदी हैं। शहरी इलाके में ज्यादा मरीज मिलने की मूल वजह जनसंख्या घनत्व बताया जा रहा है। 11 मार्च से राजधानी में शुरू हुआ मरीज मिलने का सिलसिला जारी है। मार्च में मिले मरीजों में सभी शहरी थे। अप्रैल के 204 मरीजों में से आठ ग्रामीण इलाके के थे। मई में प्रवासियों के आने के बाद ग्रामीण इलाके के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ।
इस माह में पॉजिटिव मिले 195 मरीजों में निगोहां, नगराम, मोहनलालगंज, मलिहाबाद, बीकेटी से 32 मरीज थे। इसी तरह जून के पहले सप्ताह में मिले चार मरीज राजधानी से सटे सीतापुर रोड से लगे गांव के रहने वाले थे। इसके बाद कानपुर रोड मलिहाबाद से छह मरीज पाए गए हैं।
प्रवासियों को लेकर थी दहशत
मई में दिल्ली, मुंबई और गुजरात से आने वाले प्रवासियों को लेकर दहशत का माहौल था। हालांकि, इनकी संख्या नाममात्र की थी। रेंडम सर्वे में ग्रामीण इलाके के लोगों में सामुदायिक संक्रमण नहीं मिला। इतना जरूर है कि 15 जून के बाद शहरी इलाके में पॉजिटिव पाए गए ज्यादातर मरीजों का कहीं न कहीं से दिल्ली, मुंबई कनेक्शन रहा है। इसमें से कुछ लोग खुद दिल्ली से आए थे या कई के परिवार में कोई न कोई सदस्य वहां से लौटा था।
राजधानी में फिर शुरू हुआ रेंडम सर्वे
राजधानी में स्वास्थ्य विभाग ने फिर रेंडम सर्वे शुरू कराया है। इसमें ऑटो रिक्शा चालकों और सब्जी विक्रेताओें के सैंपल लिए जा रहे हैं। मंगलवार को 210 लोगों के नमूने लिए। एसीएमओ डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि अब यह सैंपल निरंतर लिए जाएंगे। इससे वायरस के फैलाव पर लगाम लगेगी। सैंपल की जांच से पता चलेगा कि इलाके के सब्जी विक्रेता में वायरस है या नहीं। फिर इलाके के लोगों की भी जांच होगी।
शहरी इलाके में छोटे-छोटे मकान में काफी लोग रहते हैं। यहां सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पाता। ग्रामीण इलाके में जगह का फैलाव होने से वायरस का असर कम है। -डॉ. सुधीर सिंह, केजीएमयू