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93 फीसदी लोग सोशल मीडिया के लिए करते हैं इंटनेट का प्रयोग

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93 फीसदी लोग सिर्फ सोशल मीडिया के लिए कर रहे इंटरनेट का इस्तेमाल
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इंटरनेट का इस्तेमाल 93 फीसदी लोग सिर्फ सोशल साइट के लिए कर रहे हैं। इसमें 10 में से एक व्यक्ति इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का गैर पेशेवर उपयोग करता है।
वह रोजाना तीन घंटे से अधिक समय गैजेट पर देता है, जिसकी उसके लिए कोई जरूरत नहीं है।
इंटरनेट का उपयोग करने वाले हर छह में से एक व्यक्ति को सोशल मीडिया विकार होने की संभावना रहती है। यह खुलासा हुआ है केजीएमयू के मानसिक चिकित्सा विभाग के सर्वे में।
यूपी हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (यूपीएचएसएसपी) के सहयोग से यह सर्वे मुजफ्फरनगर, झांसी, महराजगंज और लखीमपुर खीरी में किया गया।
मानसिक चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रो. पीके दलाल ने बताया कि लोगों के बीच तनाव, इससे मुकाबला करने की क्षमता, सामाजिक सहायता, अवसाद, चिंता और इंटरनेट की लत की स्थिति जानने को सर्वे किया गया।
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इसमें हर सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़े 12 हजार से अधिक लोगों को शामिल किया गया। इसमें नशे के प्रयोग, मनोरंजन आदि के साधनों पर भी चर्चा हुई।
डॉ. दलाल ने बताया कि जो मध्यम स्तर के तनाव का अनुभव करते हैं, उन्हें सोशल मीडिया विकार होने की ज्यादा संभावना रहती है। ऐसे लोग दैनिक गतिविधियों से संतुष्ट नहीं होते हैं।
तनाव की मुख्य वजह आर्थिक संकट
सर्वे के दौरान 90 फीसदी लोगों ने माना कि तनाव की मुख्य वजह आर्थिक संकट है। लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए परेशानियों का सामना करते हैं। किशोरों में तनाव की मुख्य वजह पढ़ाई है। यह बात भी सामने आई कि तनावग्रस्त लोगों में करीब 90 फीसदी ऐसे हैं, जो अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं, लेकिन जागरूकता के अभाव में ऐसा कर नहीं पाते हैं।
तंबाकू का भी कर रहे सेवन
सामुदायिक नशे की स्थिति के आकलन में पता चला कि 27.6 फीसदी लोग चबाने वाले तंबाकू का सेवन करते हैं। इसी तरह 10.6 फीसदी लोग बीड़ी-सिगरेट, 10.3 फीसदी शराब, 0.6 फीसदी भांग, 0.1 फीसदी अफीम का सेवन करते हैं।
शारीरिक श्रम की अनदेखी
सर्वे में यह बात भी सामने आई कि समाज का हर पांचवां व्यक्ति किसी न किसी लंबे समय से चली आ रही बीमारी से ग्रसित है। इसकी मूल वजह खाली समय होने के बाद भी शारीरिक श्रम न करना है। ऐसे लोगों की संख्या एक तिहाई है। इससे जीवन शैली से संबंधित विकार का खतरा बढ़ रहा है। ज्यादातर लोग उच्च रक्त चाप, खून की कमी की चपेट में हैं।
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केजीएमयू में तनाव पर कार्यशाला आज
मानसिक चिकित्सा विभाग की ओर से 12 सितंबर को दोपहर दो बजे सेमिनार हॉल में ‘उत्तर प्रदेश की सामुदायिक प्रतिनिधि जनसंख्या में तनाव और तनाव से मुकाबला’ शीर्षक पर कार्यशाला होगी। इसमें कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट मुख्य अतिथि होंगे।
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