प्रदेश में पिछले चार साल से किसी नए मदरसे को मान्यता नहीं मिली है। इन बच्चों के ड्राप आउट होने का एक बड़ा कारण यह भी है। हालांकि ,माना जा रहा है कि इस साल कुछ मदरसों को मान्यता दी जा सकती है।
एआईयू से मान्यता लेने की भी तैयारी
यूपी मदरसा बोर्ड जहां भारतीय विद्यालय शिक्षा बोर्ड मंडल (कोब्से) में पंजीकरण कराने की तैयारी कर रहा है तो वहीं अब नई मशक्कत शुरू हुई है। इस बैठक में रखे गए सुझाव के बाद एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (एआईयू) में भी पंजीकरण कराने की तैयारी की जा रही है। इरादा यह है कि मदरसा बोर्ड से पंजीकृत छात्र-छात्राएं हर तरह की नौकरियों में जा सकें। प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक कल्याण के रविंद्र नायक ने बताया कि हम इसके लिए प्रयास कर रहे हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव के. रविंद्र नायक का कहना है कि मान्यता के लिए हमारे पास मदरसों के लगभग पांच हजार आवेदन पत्र लंबित हैं, जिनका सत्यापन कराया जा रहा है। मानक पूरा करने वाले आवेदक काफी कम हैं। बच्चों को आधार कार्ड से जोड़कर पंजीकृत कराया जा रहा ताकि सभी का पता चल सके। ड्राप आउट बच्चों को भी ढूंढने की कोशिश चल रही है।