कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत जंगल से सटे नैनिहा गांव निवासी राम मनोज की पत्नी सुनैना ने मंगलवार अपनी बेटी को बचाने के लिए लगभग 20 मिनट तक तेंदुए से अकेले संघर्ष किया। बेटी का सिर तेंदुए के जबड़े में फंसा देख पहले सुनैना थोड़ा सहमी लेकिन बाद में हिम्मत जुटा कर भिड़ गई।
बताते हैं कि रात नौ बजे के आसपास सुनैना खाना बना रही थी। उसने अपनी नौ वर्षीय बेटी संजनी को खाना खाने के लिए बुलाया। संजनी घर के मुख्य द्वार पर स्थित हैंडपंप पर हाथ धोने के लिए गई। इसी दौरान घर के सामने छिपे बैठे तेंदुए ने हमला कर संजनी के सिर को दबोच लिया। बेटी की चीख सुनकर मां बाहर निकली और नजारा देखकर तेंदुए पर लात-घूसों की बौछार करते हुए जबड़े से बेटी को खींच लिया। इस दौरान तेंदुआ फिर हमलावर हो गया। इसे देख दिख वह दौड़कर चूल्हे की जलती हुई लकड़ी निकालकर लाई और तेंदुए का सामना करते हुए शोर मचाया। 20 मिनट तक चले इस संघर्ष के बाद गांव के लोग एकत्र हो गए। लोगों ने हांका लगाते हुए मशाल जलाया। तब तेंदुआ जंगल की ओर गया। रात में ही बालिका के जख्मी होने की सूचना रेंज कार्यालय पर दी गई, लेकिन कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। परिवारीजनों ने ग्रामीणों की मदद से मासूम को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, मोतीपुर पहुंचाकर भर्ती कराया। वहां पर प्राथमिक उपचार के दौरान मासूम की हालत गंभीर देखकर डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
नहीं थी जानकारी, भेज रहे हैं टीम
नैनिहा गांव में तेंदुए के हमले में बालिका के घायल होने की जानकारी नहीं थी। अगर ग्रामीणों ने सूचना दी तो लापरवाही क्यों बरती गई, इसकी जांच कराएंगे। टीम को मौके पर भेजा जाएगा। पीड़ित परिवार की जो भी मदद हो सकेगी, की जाएगी। -वीपी सिंह, डीएफओ कतर्नियाघाट