लखनऊ विश्वविद्यालय की बदली हुई दाखिला नीति का खामियाजा दो दर्जन से ज्यादा डिप्लोमा, पीजी डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और प्रोफिशिएंसी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की इच्छा रखने वालों को भुगतना पड़ा है। विवि ने इस साल से ये पाठ्यक्रम एडऑन की तरह ही चलाने का फैसला किया था। प्रवेश समन्वयक ने एडऑन कोर्सेज में दाखिले की अंतिम तारीख शनिवार तय की थी।
शनिवार तक विवि के 41 एडऑन पाठ्यक्रमों में करीब आठ-नौ ही संचालित होने की स्थिति में हैं। बाकी पाठ्यक्रमों में विवि की नई नीति की वजह से ताला लग गया है। जो पाठ्यक्रम चल भी रहे हैं उनकी पूरी सीटें नहीं भर सकी हैं। लविवि की ओर से डिप्लोमा पाठ्यक्रम एडऑन की तरह चलाने की घोषणा के बाद ही ‘अमर उजाला’ ने डिप्लोमा पाठ्यक्रमों पर ताला लगने की आशंका जताई थी। अब यह आशंका सच साबित हो गई है।
लखनऊ विश्वविद्यालय ने मौजूदा शैक्षिक सत्र में पीजी में दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स को ही इन पाठ्यक्रमों में दाखिला देने का फैसला किया है। स्टूडेंट न होने पर केवल एक सूरत में दाखिला दिया जा सकता है कि वे सरकारी कर्मचारी, सैन्य कर्मी या फिर कॉर्पोरेट स्पांसर्ड हों। विवि में ज्यादातर डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और प्रोफिशिएंसी पाठ्यक्रमों की सीट पहले ही खाली रहती थीं। नई नीति लागू होने के बाद इन पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों ने आवेदन किए, लेकिन शर्त पूरी न कर पाने की वजह से कोर्स का संचालन नहीं हो पा रहा है।
विवि में ज्यादातर डिप्लोमा पाठ्यक्रम सेल्फ फाइनेंस हैं। इसलिए इनके संचालन के लिए कम से कम 40 फीसदी सीटें भरना जरूरी है। इससे कम स्टूडेंट होने पर कोर्स का संचालन नहीं हो सकता इसलिए पाठ्यक्रमों पर ताला पड़ रहा है।
सेल्फ फाइनेंस हैं ज्यादातर डिप्लोमा पाठ्यक्रम
एलयू में ज्यादातर डिप्लोमा पाठ्यक्रम सेल्फ फाइनेंस हैं। मुख्य कोर्स के साथ ही डिप्लोमा पाठ्यक्रम करने की अनिवार्यता की वजह से अभ्यर्थी आ ही नहीं रहे हैं। ऐसे में इन पर ताला पड़ना की आशंका पहले से ही थी। अब दाखिले होने के बाद यह आशंका सच साबित हुई है।
विवि में पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की फीस औसतन 20 हजार रुपये वार्षिक है। पीजी के साथ ही डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला लेने पर उसे 30 से 40 हजार रुपये फीस भरनी पड़ेगी। दाखिले न होने की यह भी एक बड़ी वजह है।
लोक प्रशासन में सभी, समाज कार्य में 50 फीसदी बंद
लोक प्रशासन विभाग में चार डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित हैं। एडऑन की अनिवार्यता होने की वजह से इस साल एक भी डिप्लोमा नहीं चल पा रहा है। विभागाध्यक्ष प्रो. नंदलाल भारती ने बताया कि इन पाठ्यक्रमों के लिए कुछ आवेदन आए थे, लेकिन अर्हता पूरी करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या सीट के मुकाबले 40 फीसदी से कम थी। इसलिए पाठ्यक्रम संचालित नहीं हो सके।
यही हालत पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग की है। वहीं दूसरी ओर समाज कार्य विभागाध्यक्ष ने बताया कि उनके यहां संचालित आठ में से चार पाठ्यक्रम ही इस साल संचालित हो रहे हैं। आवेदन न होने की वजह से बाकी बंद हो गए हैं।
इन प्रमुख पाठ्यक्रमों पर पड़ा ताला
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रुरल मैनेजमेंट, काउंसिलिंग एंड गाइडेंस, एचआईवी एड्स एंड फैमिली एजुकेशन, ह्यूमन रिसोर्स एंड मैनेजमेंट, मैनेजमेंट ऑफ एनजीओ, ह्यूमन रिसोर्स डवलपमेंट एंड आर्गनाइजेशनल बिहेवियर, हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर प्रशासन, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट, लोक प्रशासन, इलेक्ट्रानिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन, पब्लिक रिलेशंस एंड एडवरटाइजिंग, फूड प्रोसेसिंग, सुगम हिंदी।
चलते रहेंगे ये प्रमुख पाठ्यक्रम
पोस्ट एमए डिप्लोमा इन ट्रांसलेशनल, सोशल ड्यूटीज एंड ह्यूमन राइट्स, न्यूट्रोपैथिक साइंस एंड योगा, रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ, डिजास्टर रिलीफ एंड रिहेबिटेशन, क्लीनिकल, न्यूट्रिशियन व डायटिक्स।