वाणिज्य कर विभाग के पोर्टल पर दर्ज ऑनलाइन व ऑफलाइन बकाया कर वसूली के आंकड़ों और जारी आरसी में बड़ा अंतर सामने आया है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में बकाया राशि जहां 24456 करोड़ दर्ज है, वहीं ऑफलाइन रिकॉर्ड में बकाया राशि 17816 करोड़ रुपये दर्ज है।
इस तरह दोनों आंकड़ों में कुल 6640 करोड़ का अंतर सामने आया है। वहीं, जारी आरसी के आंकड़ों में भी 3.16 लाख का अंतर है। गड़बड़ी की आशंका पर वाणिज्यकर आयुक्त अमृता सोनी ने सभी जोन के एडिशनल कमिश्नरों को अपने-अपने स्तर पर इस अंतर की फिर से जांच कर इसे ठीक कराने के निर्देश दिए हैं।
दरअसल, बकाया कर वसूली को लेकर विभाग के व्यास पोर्टल और ‘मंथली प्रोग्रेस रिपोर्ट’ में सामने आए भारी अंतर को ठीक कराने के लिए मुख्यालय से लगातार निर्देश के बावजूद जोन स्तर से कोई प्रगति नहीं हो रही है। इससे बकाया टैक्स की वसूली में बड़े घपले की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वाणिज्यकर मुख्यालय ने आंकड़ों की दोबारा जांच का फैसला लिया है।
फरवरी में हुई जांच में सामने आया था कि ऑनलाइन रिपोर्ट और विभाग द्वारा जारी आरसी के आंकड़ों की तुलना में एमपीआर में दर्ज ऑफलाइन रिपोर्ट में आंकड़े काफी कम थे। इस प्रकार से दोनों के आंकड़ों में 6640 करोड़ रुपये का अंतर आ रहा है, वहीं जारी आरसी के आंकड़ों में भी 3.16 लाख का अंतर है। आश्चर्य की बात यह है कि यह अंतर पिछले दो-तीन वित्तीय वर्ष से चला आ रहा है और किसी का ध्यान तक नहीं गया।
करीब दो माह पहले वाणिज्य कर आयुक्त का दायित्व संभालने के बाद से ही आंकड़ों के खेल को समझने में जुटी अमृता सोनी ने बकाया राशि और जारी आरसी का परीक्षण करा रही हैं। इसी कड़ी में उन्होंने सभी संबंधित जोन के एडिशनल कमिश्नरों को इस अंतर का परीक्षण कराने के लिए दो महीने का समय दिया है। उन्होंने कहा कि है कि जून में आंकड़ों का निरीक्षण विभाग के उच्च अधिकारियों से कराया जाएगा।